कुछ इतिहासकारों का मत है कि ये तुर्क की मिठाई है। 1000 ईसवी के आसपास तुर्कों के कालाजामुन ने हिंदुस्तान में कदम रखा। लेकिन, तुर्क इसे गुलाबजामुन (Gulab Jamun) कहते थे। अब ये तुर्क कौन थे, जो इतनी स्वादिष्ट मिठाई के जनक बन गए। चीन की उत्तरी-पश्चिमी सीमाओं पर रहने वाली लड़ाकू और बर्बर जाति थी। ये उमैयावंशी शासकों के संपर्क में आने के बाद इस्लाम धर्म मानने लगे।
कालाजामुन के जन्म की दूसरी थ्योरी आती है ईरान से। यहां लुकमत-अल-कादी नाम की एक मिठाई बनती है। दिखने में तो बिल्कुल गुलाबजामुन जैसी है, लेकिन होती थोड़ी अलग है। इतिहासकारों का कहना है कि गुलाबजामुन का जन्म यहीं से हुआ। भारत में आने के बाद इसने खुद को मावे के साथ निखार लिया। लुकमत-अल-कादी में आटे की गोलियों को तलने के बाद शहद की चाशनी में डुबोकर रखते हैं। फिर चीनी (चीनी से पहले गुड़) छिड़ककर परोसा जाता है।
मुगलकाल में गुलाबजामुन को खूब पसंद किया जाता था। भाषा के जानकारों की मदद से इसे ईरानी बनाने की खूब जोरअजमाइश हुई। गुलाब ईरानी शब्द है, ईरानी बोले तो फारसी। इसमें गुल का अर्थ होता है फूल और आब का मतलब पानी। गुलाबजामुन तैयार करने में गुलाब जल और पंखुड़ियों का इस्तेमाल होता था। जामुन की तरह इसका रूप-रंग था, इसलिए नाम पड़ गया गुलाबजामुन।खानपान में धनी हम हिंदुस्तानी कैसे इतने रसीले गुलाबजामुन को विदेशी मान लेते। बस इसी बात पर हमने भी इसे अपने परिवार का बताने में देर नहीं की। गुलाबजामुन के जन्म की तीसरी थ्योरी थोड़ी जटिल है। जटिल मतलब इसका जन्म हिंदुस्तान में ही गलती से हुआ था। बिल्कुल रामायण के कुश की तरह।
कहानी है कि एक बार शाहजहां का खानसामा कुछ बना रहा था। उससे गलती हुई और कालाजामुन बन गया। खानासामा इसके रंग-रूप की वजह से शाहजहां की थाली तक लेकर जाने की हिम्मत नहीं जुटा सका। लेकिन, शाही सेवकों की जीभ ने इसके अलौकिक स्वाद को चखा और सूचना बादशाह तक पहुंचा दी। बादशाह ने इसे जब चखा तो खानसामा के भी मूरीद हो गए। बस यहीं से कालाजामुन मशहूर हो गया।
जानते हैं सबसे प्यारा नाम किसने दिया?
कालाजामुन के जन्म को लेकर जितने मत हैं, उतने ही इसके नाम भी हैं। कुछ जगह इसे लालमोहन कहते हैं। कालाजाम तो हम-आप भी कई बार बोल देते हैं। बांग्लादेश में तो पांटुआ, पश्चिम बंगाल में गुलाबजोम या गोलापजामुन और कुछ जगह तो कालोजाम भी कहा जाता है। लेकिन, सबसे प्यारा नाम दिया है मालदीव ने। यहां इसे गुलाबजानू बुलाते हैं।
कैसे बनाए (How to make Kala Jamun)
इसे बनाने के 2 हिस्से हैं। पहले हिस्से में कालाजामुन बनाते हैं और दूसरे हिस्से में इसकी चाशनी। 750 ग्राम मावा और 250 ग्राम पनीर कद्दुकस कर लीजिए। फिर इसे तब तक मसलिए, जब तक ये रेसारहित मुलायाम न हो जाए। अब करीब 100 ग्राम मैदा और 50 ग्राम सूजी डाल मिलाइए और करीब 10 मिनट बढ़िया से मसलिए। अब छोटी-छोटी गोलियां बना लीजिए। ध्यान रहे, अगर गोलियों में दरार आए तो मतलब होगा कि मसलने में आलस किया है। ऐसी गोलियां तलते समय फट जाएंगी और गुलाबजामुन सही नहीं बनेगा। गोलिया बनाते समय कुछ लोग ड्राईफ्रूट्स भी भरते हैं, आप ऐसा भी कर सकते हैं।
चाशनी बनाने के लिए करीब 750 ग्राम चीनी लीजिए। इसमें आधा लीटर पानी मिलाइए। चाशनी उबलने लगे तो थोड़ा कच्चा दूध डाल दीजिए। इससे चीनी की गंदगी ऊपर आ जाएगी। उसे छानकर बाहर फेंक दीजिए। फिर इस चाशनी में आधे नींबू का रस डाल दीजिए। नींबू के रस से चाशनी में चीनी के क्लॉट नहीं जमेंगे।
अब कड़ाही में घी गरम कीजिए। घी की जगह रिफाइंड भी ले सकते हैं। मीडियम आंच पर बिल्कुल लाल होने तक जो गोलियां बनाएं थे, उसे तलिए। फिर कड़ाही से निकालकर सीधे चाशनी में डुबो दीजिए। बस 5 मिनट बाद गरमा-गरम परोसिए। थोड़ा शहरी दिखावा करना हो तो ऊपर से आइसक्रिम डालकर भी परोस सकते हैं। लेकिन, मधुमेह रोगियों से इसे दूर रखिएगा।



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