स्वाद के शिखर का नहीं, ये रास्ता है मौत के शिखर का

स्वाद के शिखर का नहीं, ये रास्ता है मौत के शिखर का
प्रदीप तिवारी : अच्छा खाइये निश्चिन्त रहिए, स्वाद के शिखर पर, ऊंचे लोग ऊंची पसन्द आदि स्लोगन्स से सभी लोग अवश्य परिचित होंगे। जी हां हम बात कर रहे हैं गुटखा-पानमसाला की। देश में हजारों की संख्या में लोग मुख कैंसर से जुझ रहे है और इतनी ही संख्या में नए रोगी इस दैत्य के आगोश में जाने को तैयार है। लेकिन इनके पाउच पर लिखे ये स्लोगन इन्हे दुनिया का सबसे उत्कृष्ट पदार्थ बताने का दंब भरते हैं। विशेषज्ञों की माने तो यह उतना ही खतरनाक है जितना की सिगरेट या अन्य तम्बाकु पदार्थ। सरकार ने सिगरेट के विज्ञापन पर तो पाबंदी लगा दी लेकिन इसी के दूसरे रूप की ओर कोई ध्यान नहीं दिया। फलस्वरूप आज हर जगह पर ऐसे स्लोगन दिखाई दे जाते हैं। इठलाती हुई माॅडल जब इनका गुणगान करती हैं, तब देश का भविष्य उनके चमकते हुए तन में खो कर गुटखा की गुलामी सहज ही स्वीकार कर लेता है। एक अनुमान के मुताबिक देश में प्रतिदिन 160 करोड़ का व्यवसाय होता है गुटखे और पानमसाले का। सरकार को भी इससे रोजाना लाखों का राजस्व प्राप्त होता है। प्राप्त राजस्व और इन पदार्थों के सेवन से होने वाले नुकसान की तुलना की जाए तो शायद इससे ज्यादा घाटे का सौदा और कोई हो। सरकार ने तो नियम जारी करके अपना पल्ला झाड़ लिया की इनके पाउच पर चेतावनी लिखनी जरुरी है। कंपनियों ने भी इसे माना और पैकेट के नीचे बहुत ही छोटे अक्षरों में चेतावनी लिख दिया। शानदार विज्ञापन के मोह ने खाने वालों को ऐसा मोहा कि उन्हे इस पर लिखी चेतावनी दिखाई ही नहीं दी। जब तक उस मोह से बाहर आए तब तक बहुत देर हो चुकी थी और कैंसर रूपी दैत्य ने उसे जकड़ लिया।
गंदा है पर धंधा है बस इसी कहावत को चरितार्थ करता हुआ यह व्यवसाय दिन-दूने और रात-चैगुने गति से बढ़ रहा है। ऐसा नहीं है की यह धंधा केवल शेयर बाजार तक अपनी पैठ रखता है। इसकी पहुंच तो संसद तक है। इस व्यवसाय में जहां एक कुशल व्यवसाई है, वहीं खादी के अन्दर देशहित की बात करने वाला आम जनता का नुमाइंदा भी। बस यही कारण है की इसको फलने-फुलने के लिए भरपूर खाद-पानी मिल रहा है। विष्व के अधिकतर देशों में इस पर पूर्ण रूप से पाबंदी लगी है लेकिन अपने देश में तो मानो इस व्यवसाय को खुली छूट मिली हो। तभी तो आज का बच्चा चाॅकलेट या टाॅफी की जगह इस एक पाउच की रंगीन दुनिया का मजा लेना चाहता है।

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