अपमान की राजनीति
प्रदीप तिवारी: विश्व का सबसे बड़ा पूर्णगणतंत्र देश भारत। हमेशा से विश्व पटल पर अपनी धर्म निरपेक्षता और अहिंसा का लोहा मनवाता हमारा देश भारत। यहां पर अनेक जातियों, धर्मों के लोग एक ही छत के नीचे रह कर देश हित ही नहीं वरन विश्व हित की बात करते नजर आते हैं। इसी देश में अतिथि देवो भवः का नारा देखने को मिलता है। भले ही हम एक वक्त की रोटी खाए लेकिन अपने अतिथियों को 56 भोग खिलाने का मद्दा रखते हैं। जितना हम सभी अपने देश से प्यार करते हैं, उतना ही स्नेह दूसरे देश को भी देते हैं। लेकिन इसका यह मतलब कतई नहीं है कि हम किसी भी क्षेत्र में विश्व के अन्य देशों से कम है।
यहां पर हम बात करना चाहते हैं अपमान की राजनीति पर। समय-समय पर कुछ देशों ने हमारे देश का अनेक तरह से अपमान करने की कोशिश किया। हम यह भी जानते है कि इसमें उस देश के भी अधिकांश लोगों का सहयोग नहीं रहा होगा। यह केवल एक ओछी राजनीति का हिस्सा मात्र हैं। लेकिन क्या हमारे देश को ऐसी ओछी राजनीति का जवाब कठोरता के साथ नहीं देना चाहिए? अभी हाल ही में हिंदुओं के पवित्र ग्रंथ गीता पर रूस में अपमानजनक टिप्पणी की गई। जिसको लेकर भारत ही नहीं पूरे विश्व के लोगों ने अपना विरोध दर्ज कराया। खैर मामले के उपर अदालत ने अपना रुख सच्चाई की ओर किया। अदालत ने भी माना की गीता में हिंसा फैलाने वाला कोई भाग नहीं है। सर्वविदित है कि गीता एक पवित्र ग्रंथ के साथ ही जीवन जीने की कला सिखाने वाली पुस्तक है। गीता ही एक मात्र ऐसी पुस्तक है जिसमे कर्मयोग, ज्ञानयोग व भक्तियोग का संगम देखने को मिलता है। जिस देश के व्यक्ति में ऐसी महान पुस्तक के लिए इतने घृणित विचार हो, उस देश की शिक्षा के स्तर का अंदाजा लगाया जा सकता है। अब बात अमेरिका की करते है। भारत से दोस्ती का झंडा बुलंद करने वाले इस देश ने हर मोड़ पर हमारे देश का अपमान किया। इसी देश के पूर्वराष्ट्रपति जार्ज बुश ने अपने कुत्ते का नाम इंडिया रखा। काफी विरोध होने के बाद इन्होने सफाई दिया कि हमें भारत और अपने कुत्ते से बेहद प्यार है इस लिए मैने ऐसा किया। प्यार तो इनको अपने माता-पिता से भी रहा होगा तो क्या उनका भी नाम ऐसे ही किसी जानवर पर रखा। अभी हाल ही की घटना को संज्ञान में ले तो अमेरिका ने भारत के कई हिस्से को पाकिस्तान और चीन का हिस्सा होने वाला मानचित्र पेश किया। भारत ने इस पर अपना कड़ा विरोध जताया। लेकिन इसके बावजूद दूबारा इस गलती को दूहराया गया। कई बार यहां के फैशन शो में हिंदुओं के देवी-देवताओं के साथ अभद्र आचरण किया गया। इन सब के साथ ही हमारे देश के पूर्वराष्ट्रपति के साथ आम आदमी की भांति जांच कर देश का अपमान किया। लेकिन इन्होंने न जांच में पूरा सहयोग दिया वरन पूरी सभ्यता के साथ अपने देश की संस्कृति का तमाचा भी उनके गाल पर लगाया। हद तो तब हो गई जब एक अंतरराष्ट्रिय संगोष्ठी में हमारे देश का झंडा उल्टा लगाया गया। क्या ऐसी गलती को माफ किया जा सकता है? इन सब बातों के होने पर हमारे देश की संसद में भी पारा चढ़ा दिखाई दिया। देश को चलाने वाले हुक्मरानों को क्या ऐसा अपमान दिखाई नहीं दे रहा है? जो बार-बार ऐसी गलती करने का मौका इन देशों को दे रहा है। क्या अब भी वक्त नहीं आया कि सरकार इन बातों को अमल करते हुए एक ठोस कदम उठाए? आखिर क्या कारण है कि हमारे देश के हुक्मरान ऐसी हिमाकत करने वालों के आगे नतमस्तक हैं?
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