शोध पत्र - सोशल नेटवर्किंग साइट्स प्रयोगकर्ताओं की विषय प्राथमिकता

यह शोध केवल सोशल नेटवर्किंग प्रयोगकर्ताओं के उपर किया गया था। इस लिए हमने अपने सैंपल में केवल सोशल नेटवर्किंग प्रयोगकर्ताओं को ही शामिल किया।  प्रश्नावली विधि द्वारा प्राप्त आंकड़ों से हमें पता चला कि शत् प्रतिशत प्रयोगकर्ता फेसबुक का प्रयोग करता है। इन सबके साथ ही माइक्रब्लाॅगिंग साइट ट्विटर 46.74 प्रतिशत प्रयोगकर्ताओं का विश्वास जीत कर  दूसरे नंबर पर रही। हालांकि इन सबके बीच गूगल की अधिपत्य वाली साइट आर्कुट की ख्याति में सबसे ज्यादा गिरावट देखने को मिली। जहां 2010 में यह साइट फेसबुक को टक्कर दे रही थी वहीं 2012 में इस साइट को पसंद करने वाले महज 39.13 प्रतिशत ही रह गए। इन सब के साथ ही लिक्डइन, बिगअड्डा, माईस्पेस आदि साइट्स पर भी प्रयोगकर्ताओं का रूझान कम हुआ है। इन सभी साइट्स को पसंद करने वाले प्रयोगकर्ताओं 4.35 प्रतिशत ही हैं।
इन सबके साथ ही प्राप्त आंकड़ों से हमें पता चला कि सबसे अधिक 36.96 प्रतिशत प्रयोगकर्ता सप्ताह में 20 घंटे से अधिक समय सोशल नेटवर्किंग साइट्स पर बिताते हैं। वहीं सात घंटे से कम समय बिताने वालों की संख्या 25 प्रतिशत है, जबकि लगभग 15 घंटे तक सोशल नेटवर्किंग का प्रयोग 20.65 प्रतिशत लोग करते हैं। सप्ताह में केवल दस घंटे सोशल नेटवर्किंग साइट्स पर सबसे कम 17.39 प्रतिशत लोग रहते हैं। इन आंकड़ों से हमें ज्ञात होता है कि मौजूदा समय में लोग किसी अन्य क्रियाकलाप के स्थान पर सोशल नेटवर्किंग साइट्स पर रहना अधिक पसंद करता है। पढ़ाई, नौकरी, नित्यकर्म और सोने के बाद सबसे अधिक लोगों का समय सोशल नेटवर्किंग साइट्स के प्रयोग पर व्यतित होता है।
शोध के बाद हमें पता चला कि 61.96 प्रतिशत लोग अपने परिवार के साथ सोशल नेटवर्किंग साइट्स पर मौजूद हैं। अर्थात 61.96 प्रतिशत लोगों के परिवार के कोई न कोई सदस्य उनके साथ सोशल नेटवर्किंग साइट पर जुड़े हुए हैं। अब इसमें से एक बात निकल कर सामने आती है कि अगर किसी के परिवार का कोई सदस्य इन साइट्स पर अगर उनसे जुड़ा हुआ है तो वह कोई भी अश्लील क्रियाकलाप नहीं करेगा, क्योकि उक्त क्रिया-कलाप को उससे जुड़े हुए अन्य लोग भी माॅनीटर कर सकते हैं। लेकिन सोशल नेटवर्किंग साइट्स द्वारा शेयरिंग में फिल्टरिंग का आॅप्शन देने के कारण यह कार्य संभव हो सकता है। इस लिए इन साइट्स के मुखिया को चाहिए कि ऐसी साइट्स पर से शेयरिंग में फिल्टरिंग की सुविधा को समाप्त कर देना चाहिए। इससे इन साइट्स के दुरुपयोग करने की कोशिश को काफी हद तक रोका जा सकता है।

किसी व्यक्ति की पहचान से आशय उसका नाम, फोटो इत्यादि। अगर इन सब को बदल कर व्यक्ति सोशल नेटवर्किंग साइट पर कोई कार्य करे तो उसकी पहचान करना काफी मुश्किल होता है। यह तब और भी खतरनाक हो जाता है जब उक्त व्यक्ति अपना व्यक्तिगत कम्प्यूटर या गैजेट का प्रयोग न करके साइबर कैफे का प्रयोग करता है। इस बात का ध्यान रखते हुए शोध के दौरान यह जानने की कोशिश की कि कितने लोग अपनी पहचान बदल कर इन साइट्स का प्रयोग करते हैं। हमें जो आंकड़े प्राप्त हुए उसके अनुसार 79.35 प्रतिशत लोग अपनी पहचान बदल कर भी सोशल नेटवर्किंग साइट्स का प्रयोग करते हैं। उक्त स्थिति एक गंभीर समस्या है। इस ओर ध्यान देने की अत्यधिक आवश्यकता है। यह समाज के साथ ही सोशल नेटवर्किंग साइट्स के भविष्य और देश की सुरक्षा के लिए अतिआवश्यक है। 
   36.96 प्रतिशत प्रयोगकर्ताओं ने माना कि वे सोशल नेटवर्किंग साइट्स का अधिकतम प्रयोग अपने आफिस में करते हैं। अर्थात कार्यालय में खाली समय का उपयोग करने के लिए कर्मचारी सोशल नेटवर्किंग साइट्स पर पूरी तरह से निर्भर हैं। सोशल नेटवर्किंग साइट्स की ख्याति का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि एक समय खाली समय में कम्प्यूटर गेम्स का सहारा लेने वाले कर्मचारी अब सोशल नेटवर्किंग साइट्स पर अपना समय बिताना पसंद करते हैं। 31.52 प्रतिशत प्रयोगकर्ताओं ने माना कि वे सोशल नेटवर्किंग साइट्स का अधिकतम प्रयोग साइबर कैफे में करते हैं। जबकि 23.91 प्रतिशत प्रयोगकर्ताओं ने स्वीकार किया कि सोशल नेटवर्किंग साइट्स का अधिकतम प्रयोग अपने घर में करते हैं। 7.61 प्रतिशत प्रयोगकर्ता ऐसे भी हैं जो इन सब स्थानों के अलावा अन्य स्थान पर सोशल नेटवर्किंग साइट्स का प्रयोग करते हैं। अन्य स्थानों का आशय अपने मित्र, सहकर्मी आदि के यहां इन साइट्स का प्रयोग करते हैं।

इन सब के बीच इस बात की भी जानकारी बेहद आवश्यक है कि आखिर लोग सोशल नेटवर्किंग साइट्स का प्रयोग क्यों करते हैं? शोध के दौरान पता चला कि सर्वाधिक 33.70 प्रतिशत लोग अपने दोस्तों से जुड़े रहने के लिए सोशल नेटवर्किंग साइट्स का प्रयोग करते हैं। जबकि 25 प्रतिशत लोगों का मानना है कि सोशल नेटवर्किंग साइट्स का प्रयोग केवल आनंद के लिए करते हैं। आनंद अर्थात स्वयं की बोरियत और थकान मिटाने के लिए इन साइट्स का सहारा लेते हैं। वहीं 23.91 प्रतिशत लोग इन साइट्स के द्वारा अपनी भावनाओं का इजहार करते हैं। उनका मानना है कि सोशल नेटवर्किंग साइट्स के द्वारा हम अपनी बात को आसानी से आम व खास लोगों तक पहुंचा सकते हैं। इन सब के साथ ही 17.39 प्रतिशत लोगों ने माना कि वे सोशल नेटवर्किंग साइट्स का प्रयोग केवल टाइम पास के लिए करते हैं।
सोशल नेटवर्किंग साइट्स पर विषय एक अहम मुद्दा है। सर्वाधिक 39.96 प्रतिशत प्रयोगकर्ताओं ने माना कि उन्हें राजनीतिक और सामाजिक मुद्दों से जुड़े विषय काफी आकर्षित करते हैं। इस लिए बढ़-चढ़ कर इन विषयों से संबंधित कंटेंट और फोटों को अपलोड, शेयर या लाइक करते हैं। इन साइट्स पर 8.70 प्रतिशत प्रयोगकर्ताओं ने खेल से संबंधित विषय को अपने विषय प्राथमिकता के रूप में चुना। 7.61 प्रतिशत प्रयोगकर्ताओं ने शिक्षा से जुड़े विषयों को अपने विषय प्राथमिकता के रूप में तवज्जो दिया। जबकि 5.43 प्रतिशत लोगों ने अपने से जुड़े व्यक्तिगत विषयों को पसंद किया। वहीं पर्यावरण विषय के संबंध में सबसे कम 4.35 प्रतिशत लोगों ने अपनी विषय प्राथमिकता दिया।
सोशल नेटवर्किंग साइट्स प्रयोगकर्ताओं में सर्वाधिक 30.43 प्रतिशत ने माना कि अव्यवस्थाओं से संबंधित कंटेंट को पसंद, अपलोड या शेयर करना उनका मुख्य कार्य है। जबकि 21.74 प्रतिशत प्रयोगकर्ता इन साइट्स पर चैटिंग करते हैं। 19.57 प्रतिशत प्रयोगकर्ताओं फोटो अपलोड करते हैं। इन सब के बीच 28.26 प्रतिशत प्रयोगकर्ता इन साइट्स पर समाचार, अश्लीलता और इनसे जुड़ी बातों को करना पसंद करते हैं। 76.09 प्रतिशत प्रयोगकर्ताओं ने माना कि वे सोशल नेटवर्किंग साइट्स पर राजनीतिज्ञों की आपत्तिजनक फोटो या उन पर टिप्पणी करने वाले व्यंगात्मक लेख को पसंद या अपलोड करते हैं।

शोध के दौरान 66.30 प्रतिशत सोशल नेटवर्किंग साइट्स प्रयोगकर्ताओं ने स्वीकार किया कि वे अश्लील फोटो, वीडियो या कंटेंट को अपलोड, शेयर या पसंद नहीं करते हैं। जबकि 28.26 प्रतिशत प्रयोगकर्ताओं ने बताया कि उनके द्वारा अपलोड या शेयर कंटेंट को इन साइट्स पर से फिल्टरिंग करके हटाया गया है। इन सब के बीच 10.87 प्रतिशत प्रयोगकर्ताओं ने स्वीकार किया कि आपत्तिजनक कार्यों के कारण इनकी आईडी को बंद भी किया जा चुका है।

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