क्‍या अब भी समय नहीं आया देश के आइटी सेल की समीक्षा का

सुरक्षा एजेंसियों की नाक के नीचे देश के भोले-भाले युवकों को जेहाद के नाम पर बरगलाने वाला मेहदी मशरूर कई सालों से बेंगलूरू से आइएस का ट्विटर एकाउंट ऑपरेट कर रहा था, लेकिन हमारे खर्चे पर पल रहे देश के आइटी सेल के कथित विशेषज्ञों की टीम को उसकी भनक भी न लगी। 
चिंदी चोरी की खबरों को 36 इंच का सीना करके प्रेस नोट जारी करने वाला यह विभाग ऐसी खबरों का प्रेस नोट कब जारी करेगा अब सबके जेहन में यह सवाल है। नेशनल साइबर सेक्‍यूरिटी क्विक रिस्‍पाॅन्‍स सेल को करीब दस वर्षों से देख रहा हूं। कोई ऐसा दिन नहीं आया जब इस तरह की खबर ब्रेक की हो।
पिद्दी सा ब्रिटिश चैनल मानवता के इस दुश्‍मन को खाेज निकाला। अब बड़ी-बड़ी डीगें हांकने वाले पुलिस अधिकारियों और सुरक्षा एजेंसियों को भी पहले अपने गिरेबान में देखना चाहिए और दिल से सोचना चाहिए कि हमारे पैसों का क्‍या वे सद्उपयोग कर रहे हैं।
कभी देखा नहीं, लेकिन सुना है कि देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आइटी के काफी करीब है। रोज र्इ-पेपर से ही दिन की शुरुआत करते हैं। आधुनिक गैजेट्स उनके साथ हमेशा रहते हैं। क्‍या देश के इन गद्दारों से पूछेंगे की आखिर तुमने मेहदी को क्‍यों नहीं ढूढ़ा?
अगर पता नहीं होता तो ठीक था लंबे समय से देश को आइएस के नाम पर यह विभाग तो गुमराह भी कर रहा था। रोज एक प्रेस नोट जारी कर बता रहा था कि आइएस के मुखिया ने क्‍या जहर उगला। हाहाहाहाहहा क्‍या देश के प्रधानमंत्री इस तरह का झूठ बोलने वाले जिम्‍मेदारों को सजा देंगे ?
मेरा सोचना है कि ऐसा कभी नहीं होगा। क्‍योंकि जिसको हमने चुनकर भेजा है वे इतना जानते ही नहीं कि आखिर आइटी किस चिडि़या का नाम है...
आपका क्‍या सोचना है...

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