हमारे तो दिल में है मैगी...

करीब आठ सालों की हमारी यादों का हमसफर है मैगी। अचानक इसमें इतनी कमियां कैसे हो सकती है,
यकीन नहीं हो रहा। मेरे जानने वालों में से किसी ने तो कभी दस्त-उल्टी की भी शिकायत नहीं की, फिर मैगी इतनी बेवफा कैसे हो गई? कैंसर तो छोड़िए जनाब हमारी मैगी ने तो कभी किसी के मुह में गया निवाला भी बाहर निकालने को मजबूर नहीं किया। आसाराम की तरह पूरे देश में अचानक अभियान चल गया। डरी-सहमी सी बेचारी मैगी दुबकने को मजबूर हो गई। सरकार डरा रही है इसमें ये है... वो है..., लेकिन मुझे डर नहीं लग रहा। मेरे तो दिल में है मैगी... बाजार से गायब करवा दो, लेकिन दिल से निकाल पाओगे क्या? 
याद है कॉलेज के ओ दिन... दोपहर में दोस्तों का जुटान होता था... भूख लगने पर अपनी मैगी ही याद आती थी। कभी टमाटर-मटर डालकर स्पाइसी मैगी तो कभी कुछ नया प्रयोग करके लाजवाब मैगी बनाने की होड़। ज्यादा प्रयोग होने पर 10-12 दोस्तों के बीच खिंचाई का जो मजा था उसे तो भूल ही नहीं सकते। दोस्तों के साथ रात की पार्टी (समझ तो गए ही होंगे...) के बाद गंदी वाली जो भूख लगती थी, उसमें तो अपनी मैगी का प्यार वाकई जानलेवा होता था। 
कॉलेज में भूख लगने पर बस मैगी या पराठे ही तो याद आते थे। कोल्डड्रिंक या चाय के साथ स्पाइसी मैगी का लाजवाब स्वाद क्या आप भूल सकते हैं? प्यारे दोस्त के साथ सड़क किनारे मैगी के इंतजार का पल... ओ बार-बार खोमचे वाले को टोकना... भैया जल्दी कर दो। ऐसा कुछ भी तो नहीं भूल सकते। अस्पतालों की रसोई में बैठकर मैगी तो हमें रिझाती थी, फिर भी किसी ने उसे नहीं टोका। आज इसके खाने से कई तरह की बीमारियों के होने का रोना रोया जा रहा है। 
ठंडी के दिन तो याद ही होंगे। दिल को सुकून देने वाले के साथ रजाई में कॉफी और मैगी ही तो हमारे दिलों की धड़कनों को बढ़ाती थी। कुछ दिनों पहले की उस याद को भी कैसे मिटा देंगे जब दोस्त आपके यहां आया, लेकिन तीखी धूप की वजह से बाहर जाने की हिम्मत नहीं हुई थी। मैगी के लाजवाब स्वाद से ही उसको अपना प्यार परोसा था। 
चलो आपकी बात मान लेते हैं कि मैगी जानलेवा हो गई। इसमें अधिकतम मानक 2.5 PPM से करीब आठ गुना अधिक 17.2 PPM तक लेड पाया गया। लेकिन क्या आपने अपनी आबो-हवा की भी जांच की? जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी के एक अध्ययन में कहा गया था कि दिल्ली की फिजा कैंसर पैदा करने वाले कणों से भरी हुई है। सबसे ज्यादा ( 2,118.45 ìg/ m3) पार्टिक्युलेट मैटर ओखला में और सबसे कम ( 490.17 ìg/ m3) जेएनयू के आस-पास पाए गए। पांचो जगहों के लिए गए नमूनों में भारी धातुओं में लेड, मैंगनीज और निकेल ज्यादा पाया गया। 
रसायन विशेषज्ञों ने जो बताया उसे तो किसी ने भी न्यूज की शक्ल में पेश नहीं किया। ऐसा नहीं था उन्होंने केवल मुझे ही बताया होगा, जानकारी तो मेरे जैसे कई अन्य लोगों ने भी की होगी... लेकिन फितरत बन चुकी है... हमारा रीडर-व्यूवर जितना डरेगा उतना ही हमारे लिए अच्छा होगा। विशेषज्ञ की माने तो मैगी या कोई भी फूड पैकेट दो घंटे से ज्यादा तीन दिनों तक किसी ऐसे स्थान पर रखा जाए जहां प्रदूषण का लेवल ( 300 ìg/ m3)  से ज्यादा हो तो संबंधित पैकेट के अंदर इसका असर हो सकता है। 
... अंत में एक बाल हठ वाली बात, मैगी में भले ही साइनाइट मिला हो... फिर भी मैं तो खाना बंद नहीं करूंगा। केवल इसलिए क्योंकि मैं अपने यतीत की यादों को खोना नहीं चाहता... LOVE YOU MAGGIE DHER SARA 

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