मुझमें ही है मेरा शिक्षक...

काफी दिन बाद आज कुछ दिल से अपने लिए लिखने का मन हुआ। मौका भी था, शिक्षक दिवस का। खुद को रोक न सका। लैपटॉप ऑन करने का मन न हुआ, फिर भी लिखने की बेचैनी ऐसी थी कि मोबाइल पर ही शुरू हो गया।
सबकी तरह मेरे भी कई ऐसे गुरु हैं, जिन्होंने मुझे संवारने का भरसक प्रयास किया। किसी को नहीं भूला हूं। न तो उन्हें भूला हूं जिन्होंने प्राथमिक शिक्षा दी, न ही उनको जिन्होंने ग्रेजुएट बनाया। उनको भी नहीं भूला हूं, जिन्होंने पत्रकारिता का ककहरा सिखाया। सबका ताउम्र अहसानमंद रहूंगा। यहां तक का सफर बगैर आपके उस अहसान के कभी पूरा न हो पाता।
सच कहूं तो हर मोड़ पर मैंने अपना गुरु पाया। सब ने कुछ न कुछ सिखाया, लेकिन स्वीकार वही किया जिसे मेरे दिल ने कहा। खुद को अपना सबसे बड़ा गुरु मानता हूं। माफी चाहूंगा उन सभी लोगों से, जिन्होंने मुझे बहुत कुछ सिखाया, लेकिन यही सच है। सवालों की पोटली को पूरी-पूरी रात मैंने खुद से खोली है। दिल के हर सवाल का जवाब दिमाग के अनुत्तर होने तक दिया है। देश, समाज, परिवार, शिक्षा, करियर, प्यार हर विषय पर दिल की बात को दिमाग की कसौटी पर खरा उतारने के लिए लेकर गया हूं। तब तक सवालों से लड़ा हूं, जब तक दिमाग ने दिल की बात स्वीकार न कर ली हो। 
उस वक्त जब घर, परिवार, करियर की टेंशन में ज़िन्दगी की फ़िल्म खत्म करने की सोची, तब भी मेरे खुद के शिक्षक ने ही राह दिखाई। हर मुसीबत से लड़ना सिखाया, सब्र क्या होता है ये भी मैंने खुद के शिक्षक से ही सीखा। कठिन मेहनत से पैर डगमगाए तो मेरे खुद के शिक्षक ने ही संभाला। वरिष्ठों के त्याग, प्रतिद्वंदियों की मेहनत और जूनियर्स की लगन का उदाहरण देकर मेरे खुद के शिक्षक ने मुझे आगे बढ़ने का हौसला दिया। 
सच तो ये है कि जब कोई न मिला पास तो मैंने खुद में ही एक शिक्षक को ढूढ़ लिया। एक आदर्श शिक्षक, जो मेरे बेवकूफी वाले प्रश्नों से चिढ़ता नहीं है और मेरे अच्छे प्रश्नों को पूछने से पहले खत्म नहीं होने देता। हर वक्त मुझसे हर विषय पर वाद-विवाद करता है। गलत होने पर सुधार कराता है, लेकिन मज़ाक नहीं उड़ाता। कई बार ऐसे भी मौके आते हैं, जब सवालों की झड़ी लग जाती है, तब भी मेरा शिक्षक धैर्य नहीं खोता है और हां, जब सवाल का जवाब उसके पास नहीं होता है तो दूसरी राह भी दिखाता है। 
अभी रात के 1 बज रहे हैं। नींद आ रही, लेकिन ये मेरे अंदर के खुद के शिक्षक ही हैं, जो ये सब लिखने के लिए मजबूर कर रहे हैं। कुछ सीखने, जानने का सफर आगे भी चलता रहेगा। मेरे अंदर के शिक्षक आगे बढ़ने के लिए ऐसे ही प्रेरित करते रहेंगे, बाकी हर कदम पर मिलने वालों को अपना गुरु बनाता चलूंगा। बस बात केवल इतनी होगी कि सुनूंगा तो सबकी, लेकिन करूंगा तो केवल अपने ही मन की।
सभी गुरुजनों को कोटि कोटि प्रणाम... 
दिल से आभार...

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