अफसरशाही ने एक सिपाही को निगल लिया...

गुड़गांव के अडिशनल सेशन जज #कृष्णकांत की पत्नी रितु और बेटे ध्रुव का हत्याकांड निःसंदेह अक्षम्य है। यह सब उनके ही गनर हरियाणा पुलिस के सिपाही महिपाल ने किया। वारदात से ज्यादा सोशल मीडिया पर चल रहे फुटेज विचलित कर रहे हैं। सिर में गोली लगते ही ध्रुव गिर गए, फिर 2 गोली मारी। महिपाल वीडियो में ध्रुव को घसीट कर बस इसलिए कार में डालना चाहता था, क्योंकि उसे दूर कहीं फेक सके, इलाज न मिले और वह मर जाए। 3 गोलियों के बाद ध्रुव का शरीर भी हरकत करना बंद कर चुका था। #महिपाल को यह आभास हुआ तो ध्रुव को 2 गोली लगने से बेहोश हो चुकीं उनकी माँ के पास ही छोड़कर कार लेकर भाग गया। घटनाक्रम बस इतना नहीं है।

सिपाही महिपाल का आक्रोश, दर्द, डिप्रेशन कई महीनों का था, जिसने ज्वालामुखी का रूप ले लिया। बात एक जज की है, फिर रिपोर्ट भी शीशे नहीं दर्पण की तरह ही होगी... बस एकतरफा...

अफसरशाही ने एक सिपाही को निगल लिया। पता है आपमें से कई लोग इस लाइन पर मुझे गलत कहेंगे। करीब से देखा है चमकते जूतों में काले दिल वाले अफसरों और उनके अभिमानी परिवारों को। आप स्ट्रीट डॉग से वैसा व्यवहार नहीं करते, जैसा कुछ ये सफेदपोश अपने अर्दलियों से करते हैं।

एक कहानी बताते हैं, बिल्कुल सच वाली...
एक बहुत करीबी थाना इंचार्ज की भूमिका में थे। रात करीब 12 बजे साहब के बंगले से मॉर्टिन के लिए कॉल आया। कारखास (इंस्पेक्टर का खास सिपाही) को उन्होंने मॉर्टिन पहुंचाने के लिए कह दिया। थाने से करीब 500 मीटर दूर बंगला था, लेकिन सिपाही मॉर्टिन लेकर एक घण्टे बाद पहुंचा। लापरवाही की वजह से नहीं, विभागीय काम में फंसे होने से देर हुई।

साहब ने कुछ नहीं कहा, लेकिन मेमसाहब और उनकी 20-22 साल की बेटी ने पूरी गार्द (आवास पर सुरक्षा में तैनात जवानों की टीम) के सामने सिपाही को बहुत कुछ सुनाया, अपशब्द भी कहे। दिसम्बर की ठंड में गार्डन में लगे पौधों में बेवजह पानी छिड़कने का हुक्म दिया। सब कुछ गार्द के 8-10 सिपाहियों के सामने हुआ, जिनका सरकारी क्वार्टर कारखास के आसपास ही था। पूरी कॉलोनी में बात फैल गई। तन कर चलने वाला सिपाही सबसे निगाहें नीची किए चलने लगा। उधर दूसरी तरफ इंस्पेक्टर साहब को रात में ही थाने से हटाने का हुक्म जारी हो गया।

एक कहावत है ये वर्दी का नशा ही होता है, जो पहनते ही रुआब आ जाता है। मूंछों पर ताव और फूला सीना ही सिपाही की शान है। 12 नहीं, 22 घण्टे ड्यूटी लीजिए, उफ्फ नहीं करेगा सिपाही, लेकिन उसकी शान को मिट्टी में मिलाएंगे तो महिपाल जरूर बन जायेगा।

अब जज साहब वाले केस पर आते हैं। महिपाल के दोस्तों ने इस ज्वालामुखी के फटने की असली बात बताई। उससे नौकरों की तरह काम लिया जाता था। जज साहब की सुरक्षा में तैनात सिपाही से सब्जी, दूध या घर का सामान मंगाते थे। मेमसाहब शॉपिंग करें और गनर बैग उठाकर चले। बच्चे भी अफसरशाही में घुड़की दें। हिंदू से ईसाई बन गया महिपाल तो क्या ये मज़ाक का टॉपिक हो गया? कई दिनों से महिपाल छुट्टी मांग रहा था। उसे गालियां दी जाती थीं। ड्यूटी बदलने की अफसरों से दरख्वास्त की। पावर के आगे नतमस्तक महिपाल के अफसर भी घुड़की देकर टरका दिए।

एक सिपाही के रौब को रौंदकर जब इतना गिरा देंगे तो महिपाल क्या पुतला भी डिप्रेशन में आ जाएगा। सवाल तो जज कृष्णकांत से पूछना चाहिए कि उनका गनर उनकी पत्नी और बेटे के साथ क्यों था?
महिपाल को खुद ड्राइव करके रितु और ध्रुव को लेकर मार्केट जाने को किसने मजबूर किया?
जज साहब जब अहम मीटिंग में थे तो उनका सुरक्षाकर्मी उनके पास क्यों नहीं था?
अगर सिपाही महिपाल कई दिनों से ऊंटपटांग बातें कर रहा था तो उसे हटाने के लिए किसी अफसर को क्यों नहीं लिखा?

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