पिछले चुनाव में बीजेपी का घोषणा पत्र। ढेरों वादे थे। कुछ पूरे हुए, कुछ बस कागजों में सिमटे रहे। दावों की ये पोटली 5 साल पहले खूब चर्चा में थी। अगर आज इसे हमने भुला दिया तो राजनीति भले आबाद रहे, लेकिन हमारा जमीर जरूर मर जायेगा। हमारे संस्कार, संस्कृति, जड़ें बस इस बदलाव के साथ ही दफन हो जाएंगी।आगे कुछ लिखूं उससे पहले महाभारत के एक प्रसंग का जिक्र जरूरी है...
जब अर्जुन बाण चलाते और कर्ण के रथ पर लगता तो उसका रथ बहुत दूर तक पीछे चला जाता। जब कर्ण बाण चलाते तो अर्जुन का रथ कुछ कदम ही पीछे हटता। फिर भी कृष्ण कर्ण की बहुत तारीफ करते। अभिमान से भरे अर्जुन से कृष्ण की ये हरकत सहन नहीं हुई और कारण पूछ लिया। कृष्ण ने कहा, हे पार्थ आपके रथ की पताका पर पर्वत लिए हनुमान विराजे हैं। तीनों लोक का भार लेकर मैं स्वयं हूं, अष्ट सिद्धि और नौ निद्धियां भी हैं, फिर भी कर्ण इस रथ को पीछे हटा दे रहा।
अर्जुन के उसी रथ की तरह बीजेपी के 2014 के घोषणा पत्र पर बुजुर्गों का आशीर्वाद था। अटल, लालकृष्ण, मुरली मनोहर जैसे नेताओं का हाथ था। हर पन्ना खुशहाल था। बुजुर्गों की फ़ोटो से आबाद से था। लेकिन, इस बार ये सूनापन है। अटल, आडवाणी, मुरली मनोहर वही नेता हैं, जो बीजेपी को इस मुकाम तक पहुंचाए हैं। जेल गए, लाठी खाए। एक-एक रुपये का चंदा जुटाने के लिए रात को भी दिन समझे। स्वयंभू बने नेता की तरह पहचान छुपाकर हिमालय में जाकर छिपे नहीं, सत्ता पक्ष की लाठियों का मुकाबला किया।
इस बार का संकल्प पत्र तानाशाही ज्यादा लगा। गौरान्वित करने वाला एक विशाल और अनुशासित संगठन केवल एक व्यक्ति का चेहरा कैसे बन गया। कहां चले गए वो संस्कार, संस्कृति जिस पर इस भगवा को गर्व होता था। 'पहले आप-पहले आप' हमारी संस्कृति रही है। हमने ये कहां से सीख लिया 'पहले मैं'। सब खामोश हैं, लेकिन इस संगठन से जुड़ा हर व्यकि आज अफसोस जरूर कर रहा होगा।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने निःसंदेह बेहतरीन काम किया है। गर्व करने वाले कई पल हमें दिए हैं। उनके खास अमित शाह ने भी शानदार रणनीति दिखाई, लेकिन संगठन से खुद को कैसे बड़ा मान बैठे। भूल गए कि पद भले दिया है, लेकिन कमल की इस केसरी ध्वजा के नीचे ही हैं। ऊपर जाने का इस बार किया गया ये दुस्साहस कीमत जरूर वसूल करेगा। संगठन के आदर्शों की लाज होती तो आज बुजुर्ग संकल्प पत्र पर होते।
इस बार का संकल्प पत्र बस उसी तरह सूना लग रहा, जैसे घर का बुजुर्ग स्वर्गवासी हो गया हो। दुआर खाली हो और आंगन सूना हो गया हो।
(दुआर- घर के सामने बैठने की खाली जगह)
#BHPSankalppatr2019
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