रामपुरी रियासत और जायका

खानपान से नवाबों का खास रिश्ता था। अवध, लखनऊ, हैदराबाद, रामपुर, जूनागढ़ नवाबों के कई किस्से हैं। रामपुर रियासत के पकवानों की चर्चा खूब थी। यहां खानसामों की पूरी एक फौज थी। खड़े मसाले, दूध, दही, मावा, केसर, ड्राइफ्रूट्स इनके खानों की रंगत बढ़ाते थे। मिर्च का हलवा, कटहल कबाब, संभल की सीख, फिन्नी नान, अंडे का हलवा, दूधिया बिरयानी के तो अंग्रेज भी गुलाम थे। अवधी, मुगलई, अफगानी खाने की यहां छाप दिखती थी। रामपुर की रसोई ने कई विदेशी व्यंजनों में बदलाव कर देसी खुशबू से लबरेज किया था। यहां का ऐसा ही एक व्यंजन है नवाबी पनीर।

नवाबी पनीर का इतिहास वैसे तो अफगान से जुड़ा है। लेकिन, रामपुर नवाबों के खानसामों ने कुछ बदलाव कर टेस्ट में इसके चार चांद लगा दिया। अफगानी पनीर बनाते समय दूध में प्याज को उबाला जाता है। लेकिन, रामपुर में इसमें बदलाव हुआ। सफेद मिर्च की जगह काली मिर्च, हल्दी की जगह केसर, मक्खन की जगह देसी घी का इस्तेमाल किया। पनीर को तंदूर की गर्माहट से लाल करने की जगह सीधे ग्रेवी में डालकर रंगत भी निखारी। और हां, खास बात तो यह कि हींग को इन्होंने पूरी तरह निकाल बाहर किया।

नवाबी पनीर बनाते कैसे हैं


- 250 ग्राम पनीर, 3 मिडियम साइज प्याज, 1 फूल लहसुन, 2 इंच अदरक, 2 हरी मिर्च, 9-10 दाने काली मिर्च, 4-5 लौंग, 2 बड़ी इलायची, 1 चम्मच जीरा पाउडर, डेढ चम्मच धनिया पाउडर, 1 चम्मच सौंफ, 2 हरी इलायची, 1 फूल जावित्री, 2 इंच की दालचीनी, 2 तेजपत्ता, 100 ग्राम काजू, कसूरी मेथी, हरी धनिया, दूध, दही, 1 कप मलाई, केसर, देसी घी, नमक।
काजू, प्याज, अदरक, लहसुन का पेस्ट बना लीजिए। कढ़ाई गर्म कीजिए।

काली मिर्च, जावित्री, जीरा, सौंफ, हरी इलायची, लौंग को भूनकर पीसने के बाद अलग रखिए। कढ़ाई में घी गर्म हो जाए तो प्याज वाला पेस्ट डालकर हल्का सुनहरा होने तक भूनिए। सूखे मसालों का जो पाउडर है, उसे धनिया पाउडर के साथ एक कटोरी में लेकर थोड़ा पानी मिलाकर पेस्ट बना लीजिए। इसे अब कढ़ाई में डालिए और घी छोड़ने तक भूनिए। अब बारी है दही मिलाने की।

आंच बिल्कुल धीमी कीजिए। फेटी हुई दही को मिलाकर घी छोड़ने तक चलाते रहिए। बस अब करीब डेढ़ कप दूध मिलाइए। ढंककर 5 मिनट धीमी आंच पर पकाइए। अब मलाई मिलाइए। फिर बड़ी साइज में कटी पनीर डालकर अगले 5 मिनट तक फिर पकाइए। अब कसूरी मेथी डाल दीजिए। 1 मिनट पकने के बाद केसर के 4-5 धागे डालिए, फिर हरी धनिया डालकर ढंक दीजिए। बस तैयार नवाबी पनीर। इसे तंदूरी रोटी के साथ खाने में स्वाद दोगुना मिलेगा।

रामपुर रियासत के कुछ तथ्य


- रामपुर रियासत के आखिरी नवाब रजा अली खान की अरबों रुपये की संपत्ति थी। अब इस दौलत के बंटवारे की प्रक्रिया चल रही है। इस रियासत में दस नवाब बने। पहले नवाब फैजुल्ला खान के बड़े बेटे मुहम्मद अली खान 17 जुलाई 1994 में रियासत के दूसरे नवाब बने। लेकिन, उनका शासनकाल केवल 24 दिन तक ही रहा।

- रामपुर को दिल्ली और लखनऊ के बाद कविता का तीसरा स्कूल माना जाता था। दाग देहलवी, गालिब, अमीर मीनाई रामपुर दरबार के रत्न थे।

- रजा लाइब्रेरी, हामिद मंजिल बड़ी सांस्कृतिक धरोहर हैं।

- शास्त्रीय संगीत में रामपुर सहसवान घराने की उत्पत्ति का श्रेय भी इसी धरती को मिलता है। उस्ताद महबूब खां रामपुर दरबार में वीणा वादक थे।

- 450 एकड़ में कोठी खासबाग है। 1930 में इसमें एसी लगा था। 250 से ज्यादा कमरें, हॉल, सिनेमा हॉल आदि हैं।

कोठी खासबाग में थे एसी रूम


कोठी में एक बर्फखाना बनाया गया था। इसमें लोहे के फ्रेम में बर्फ की सिल्ली रखी रहती थीं। इनके पास में दो मीटर से भी बड़े साइज के पंखे लगे थे।

इनको चलाने के लिए 150 हार्सपावर की बिजली मोटर लगाई गई थी। पंखे की हवा बहुत तेज निकलती थी, जो बर्फ की सिल्लियों से होकर कोठी के कमरों में जाती थी।

कमरों तक हवा पहुंचाने के लिए पूरी कोठी के नीचे दो गुणा दो फीट की पक्की नाली बनाई गई थी। इस सेंट्रल नाली से कमरों के लिए छोटी-छोटी नालियां बनाई गईं थीं। इन नालियों के मुंह पर फ्रेम लगाए गए थे, इनसे जरूरत के मुताबिक ही हवा निकलती थी। इस सिस्टम की देखरेख के लिए इंजीनियरों की पूरी टीम थी।




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