पार्ट 1ः आपके जागने से सोने तक का हर डेटा वेब पर

जॉन को स्पोर्ट्स शू लेना था। कौन सा बेस्ट रहेगा, इसी पर मोहित के साथ बात हो रही थी। कुछ देर बाद उसने एक वेबसाइट खोली। वहां जूतों के विज्ञापन दिखने लगे। ऐसा ही कुछ रमेश के साथ हुआ। उन्हें अंडरगारमेंट्स लेने थे। एक वेबसाइट पर देखा, लेकिन पसंद नहीं आया। कुछ देर बाद उन्होंने आईआरसीटीसी की वेबसाइट खोली। वहां पर अंडरगारमेंट्स के ऐड दिखने लगे। स्क्रीनशॉट लेकर आईआरसीटीसी को टैग करते हुए ट्वीट किया। आईआरसीटीसी ने जवाब दिया, आपकी पसंद से गूगल यह ऐड दिखा रहा है। पसंद मतलब कुछ वक्त पहले ऐसा कुछ किसी वेबसाइट पर देखा होगा। ट्विटर पर रमेश को इसकी वजह से शर्मिंदगी भी उठानी पड़ी। जॉन के जैसे केस में गूगल ने अपनी गलती मानते हुए खामी को दूर करने का भरोसा दिया था। 

ये तो केवल 2 उदाहरण हैं प्राइवेसी का मतलब समझाने के लिए। आपके जागने से लेकर सोने तक का हर रिकॉर्ड कोई रख रहा है। खाने में क्या पसंद है, कहां जाते हैं, कितनी देर रुकते हैं, सैलरी कब आती है, मोबाइल कब खरीदा था, जूते, कपड़े कब लिए थे, किसे ज्यादा कॉल करते हैं, किसे मेसेज करते हैं, वॉट्सऐप, फेसबुक, ट्विटर कितनी देर यूज करते हैं, किस वक्त सोशल साइट ज्यादा इस्तेमाल करते हैं आदि सभी जानकारी। फ्री में मिले फेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम, वॉट्सऐप, वेब सर्चिंग की कीमत आपके डेटा से वसूली जाती है। 

इसी तरह निजी कंपनियों और बैंकों के ऑपरेशन से जुड़े डेटा होते हैं। देश की सुरक्षा, पॉलिसी, प्लानिंग की जानकारियां होती हैं। ये बेहद कीमती होते हैं। ऐसे डेटा की सुरक्षा पर भारी-भरकम रकम खर्च होती है। लेकिन, मजबूत स्ट्रैटजी के लिए इस डेटा की हर जगह मांग होती है। हर देश अपने दुश्मन के डिफेंस, पॉलिसी और प्लानिंग से जुड़े डेटा हथियाना चाहता है। क्रेडिट कार्ड, डेबिट कार्ड, इंटरनेट/मोबाइल बैंकिंग, हेल्थ, इंश्योरेंस आदि डेटा को भी सुरक्षित रखना पड़ता है। लेकिन, कई बार ये चोरी जाते हैं। पिछले दिनों एक खबर चर्चा में थी कि एक बैंक के कार्ड का डेटा लीक हुआ है। बाद में बैंक ने ग्राहकों के कार्ड बदले थे। 


कैसे सुरक्षित रखते हैं डेटा

हर कोई डीप वेब में अपने डेटा को सुरक्षित रखता है। डीप वेब मतलब, जिसे सामान्य तौर पर सर्च न किया जा सके। वेबसाइट पर ऐसे पेज जिसे इंडेक्स न किया गया हो। सर्च इंजन ऑप्टिमाइजेशन न हो। कोई भी की-वर्ड्स डालने पर सर्च न हो। उदाहरण के तौर पर आपके सोशल मीडिया और ई-मेल का पासवर्ड, आधार व पैन का डेटा, बैंक डिटेल, नेटफ्लिक्स, अमेजन, जी-5 का अकाउंट डिटेल, क्लाउड पर रखी गई फोटो, विडियो, स्वास्थ्य से जुड़ी रिपोर्ट या कोई अन्य फाइल। ऐसे डेटा डीप वेब में रखे जाते हैं। सामान्यतौर पर इंटरनेट (सर्फेस वेब) पर हम जो एक्सेस करते हैं, उसका यह करीब 550 गुना होता है। ऐसे ही डेटा चुराने के लिए वेबसाइट हैक होती हैं। डेटा हैक होने से कई कंपनियां डूब गईं या बिजनेस में बुरी तरह पिछड़ गईं। लोगों के प्राइवेट डेटा लीक हुए तो सुसाइड तक के मामले सामने आए।


डेटा लीक के बड़े मामले

1.Yahoo: 3 बिलियन यूजर्स के नाम, ईमेल, जन्मतिथि, टेलीफोन/मोबाइल नंबर, पासवर्ड चोरी हो गए थे। कहते हैं कि यह इतिहास की सबसे बड़ी डेटा चोरी थी। 2013-14 में ऐसा हुआ था, लेकिन याहू ने 2016 में स्वीकार किया। इसके बाद कंपनी उठ नहीं सकी।

2.Marriott International: अमेरिका की बड़ी हॉस्पिटैलिटी कंपनी। लग्जरी होटलों की लंबी लिस्ट। नवंबर 2018 में सामने आया कि 500 मिलियन ग्राहकों का पर्सनल डेटा और क्रेडिट कार्ड डिटेल चोरी हो गई। बाद में चाइनीज खुफिया समूह को इसका जिम्मेदार बताया गया।

3.Adult Friend Finder: अमेरिका की जानी-मानी डेटिंग साइट थी। अक्टूबर 2016 में 412.2 मिलियन अकाउंट्स की डिटेल्स चोरी हो गईं। इनमें कई नामी हस्तियां भी थीं। करीब एक महीने बाद एक वेबसाइट पर पूरा डेटा ऑनलाइन कर दिया गया। कुछ मेंबर ऐसे भी थे, जिन्होंने सुसाइड कर लिया था। 

सोशल नेटवर्क LinkedIn, Adobe, Dubsmash, eBay, Heartland Payment Systems, My Fitness Pal जैसे दिग्गजों के ग्राहकों की निजी जानकारियां लीक हुई थीं। कुछ देशों की रक्षा सूचनाएं, पॉलिसी और दूसरे डेटा चोरी या हैक हुए। हालांकि इसे स्वीकार नहीं किया गया। बेहद सुरक्षित माने जाने वाले डीप वेब में ये सेंसिटिव डेटा स्टोर किए गए थे। लेकिन, इनमें से कुछ तो सीधे तौर पर सर्फेस वेब पर लीक कर दिए गए। काफी डेटा डार्क वेब पर बेचने के लिए रखा गया। बोली लगी, खरीदार जुटे। प्रतिद्वंद्वियों ने मुंहमांगी कीमत पर इन्हें खरीदा और अपना हित साधा। 

ऐसे में यह कहना कि डार्क वेब पर केवल अपराधी होते हैं, गलत है। साफ तौर पर कहा जाए तो ग्लोबर स्तर पर बिजनेस की एबीसीडी डार्क वेब से शुरू होती है। चाहे वहां से डेटा खरीदने के लिए या हैकर हायर करने के लिए। आर्कुट को पछाड़ना हो या याहू को, रास्ते पर रोशनी डालने का काम डार्क वेब ने किया है। 

अगली किस्त मेंः कैसे इतनी मायावी है डार्क वेब की दुनिया  

टिप्पणियाँ

नजर मचान से... ने कहा…
वाह....उम्दा जानकारी। लोगों को ये मालूम होना चाहिए कि फ्री में कुछ नहीं मिलता।