पार्ट 2: कैसे इतनी मायावी है डार्क वेब की दुनिया

डार्क वेब की दुनिया आखिर इतनी मायावी क्यों हैं? इस सवाल का जवाब इसकी परिभाषा में ही छुपा है। जिस तरह सरफेस वेब पर वेबसाइट .com, .in, .gov, .org, .edu आदि डोमेन एक्सटेंशन के साथ होती हैं, उसी तरह डार्क वेब पर .onion का राज चलता है। सरफेस वेब की वेबसाइट्स किसी सर्वर पर होती हैं। यहां सर्वर कंपनी को एड्रेस पंजीकरण कराना जरूरी होता है।

विज्ञापन और #SEO (सर्च इंजन ऑप्टिमाइजेशन) के लिए ऐसा करना जरूरी होता है। पंजीकरण नहीं कराने पर वेबसाइट लाइव ही नहीं होने दी जाती। किसी तरह का क्राइम करने पर पुलिस उस सर्वर पर पहुंचती है। फिर वहां से वेबसाइट को ब्लॉक करके डेटा कब्जे में ले लिया जाता है। #IP (इंटरनेट प्रोटोकॉल) एड्रेस के जरिए वेबसाइट संचालक तक पहुंच जाते हैं।

#DarkWeb में यहीं पर खेल होता है। यहां इस तरह के पंजीकरण की कोई जरूरत नहीं होती। वेबसाइट को लाइव करने के लिए किसी सर्वर की जगह पर्सनल कंप्यूटर का इस्तेमाल होता है। आईपी एड्रेस को छुपाकर #VPN (वर्चुअल प्राइवेट नेटवर्क) के जरिए सर्फिंग होती है। अब अगर किसी की आईपी और सर्वर का नहीं पता तो उसे खोजेंगे कैसे? जब सर्च नहीं कर सकेंगे, तब वेबसाइट भी ब्लॉक नहीं होगी।

सुरक्षा एजेंसियां अगर पता भी लगा लें तो वेबसाइट चलाने वाला अपना कंप्यूटर बंद कर देगा। कंफ्यूटर बंद होते ही सर्वर कनेक्टिविटी टूटेगी और उसकी वेबसाइट ही ऑफलाइन हो जाएगी। डेटा भी इससे सुरक्षित रहेगा और पुलिस को पता भी नहीं चलेगा। सवाल उठता है कि एसईओ और ऐड का क्या होगा? डार्क वेब पर एसईओ की जरूरत नहीं होती। वेबसाइट एड्रेस क्लाइंट और ओनर के बीच शेयर होता है। कुछ चर्चित वेबसाइट के लिए सर्च इंजन कम डिक्सेनरी है। सिलेक्टेड एक्सेस की वजह से ऐड की यहां जरूरत नहीं होती है।

यहां चलता है टॉर का राज

गूगल, मोजिला, माइक्रोसॉफ्ट, यूसी के इंटरनेट ब्राउजर से तो बखूबी वाकिफ होंगे। लेकिन, ये सभी डार्क वेब के लिए फेल होते हैं। यहां की वेबसाइट तक पहुंचाने के लिए #TorBrowser जरूरी होता है। ऐसा नहीं है कि यह प्रतिबंधित ब्राउजर है। कानूनी तौर पर इसके इस्तेमाल की इजाजत है। आपकी आईपी और सर्फिंग की गतिविधियों को छुपाने का भी यह काम करता है। यही वजह है कि इस ब्राउजर से की गई सर्फिंग को ट्रैक करना बेहद मुश्किल है। डार्क वेब की वेबसाइट्स सरफेस वेब से अलग होती हैं। इन्हें याद रखना बेहद मुश्किल होता है। kpvz7ki2v5agwt35.onion की तरह डार्क वेब पर साइट्स का नाम होता है।

वेबसाइट ढूंढने में मददगार होंगे ये 5 

डार्क वेब पर अपनी पसंद या काम की वेबसाइट की तलाश में है तो यह बेहद मुश्किल काम है। सामान्यतौर पर वेबासाइट ओनर ही अपने क्लाइंट को एड्रेस देता है। लेकिन, यहां पर कई मशहूर वेबसाइट्स हैं। इनके नाम सार्वजनिक हैं। कुछ ऐसी वेबसाइट भी हैं जो चर्चित और जरूरी वेबसाइट के बारे में जानकारी देती हैं।
जिस विकीपीडिया को हम सामान्यतौर पर जानते हैं, उसका असली वर्जन डार्क वेब पर ही है। अमेरिकी राष्ट्रपति के मेल, यूएस डिफेंस की गुप्त जानकारियां, विभिन्न देशों में किए गए हमलों से जुड़ी जानकारियां और मानवाधिकार उल्लंघन के कई मामलों का खुलासा किया था। सोनी कंपनी से जुड़ी गुप्त जानकारियों को भी सार्वजनिक कर चर्चा में रहे थे। विकीलिक्स को ये सब डार्क वेब पर ही मिला था। डार्क वेब पर http://zqktlwi4fecvo6ri.onion/wiki/index.php/Main_Page पर विकीपीडिया मिलेगा।

इसी तरह 4 और वेबसाइट्स से मदद मिल सकती है।
1. DuckDuckGo: https://3g2upl4pq6kufc4m.onion/
2. Candle: http://gjobqjj7wyczbqie.onion/
3. Not Evil: http://hss3uro2hsxfogfq.onion/
4. SearX: http://ulrn6sryqaifefld.onion/
इनमें से #Searx विकीपीडिया के बाद सबसे बेहतर रिजल्ट वाली वेबसाइट है। यहां फोटो, मैप, म्यूजिक, न्यूज, साइंस, सोशल मीडिया पोस्ट, विडियो आदि के बारे में बेहतर रिजल्ट मिल सकता है।


पार्ट 3 मेंः कैसे होती है बातचीत और ट्रांजेक्शन, कहां मिलते हैं मुखबिर

पढ़ें पार्ट 1ः आपके जागने से सोने तक का हर डेटा वेब पर: https://bit.ly/2YTIcML

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