आज की बेहतरीन खबर। हर लाइन पढ़कर वाह-वाह करेंगे। इस खबर की एक दिलचस्प कहानी है। #फेसबुक पर कंटेंट का सबसे ज्यादा हिस्सा टेक्स्ट का है। टेक्स्ट के इसी हिस्से को इस्तेमाल लायक मतलब बेचने लायक बनाने के लिए आर्टिफिशल इंटेलिजेंस (#AI) टेक्नॉलजी पर काम किया गया। टेक्स्ट का विश्लेषण, जनसंख्या घनत्व, ट्रांसलेशन, चैटबोट्स, विडियो ट्रांसफॉर्मेशन, बैड कंटेंट मतलब भड़काउ पोस्ट, #न्यूडिटी, हिंसा, आतंकवाद, स्पैम, फेक अकाउंट और आत्महत्या रोकने के लिए पूरी रिसर्च विंग खड़ी की।
बाकी सारे हिस्से कमाई का जरिया थे, लेकिन #आत्महत्या रोकना कठिन काम था। रेवेन्यू जेनरेट होने का कोई ऑप्शन यहां नहीं था। एक आंकड़ा है कि 15 से 29 साल के बीच का कोई न कोई हर 40वें सेकंड में आत्महत्या करता है। फेसबुक ने सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी की वजह से साल 2017 में इस पर गंभीरता से काम शुरू किया। साल के अंत तक बेहतर एआई टेक्नॉलजी डिवेलप की। लेकिन, इसकी प्रोग्रामिंग आसान न थी।
रिसर्च में एआई की टीम ने पाया कि आत्महत्या से पहले लोग Kill, Die, Goodbye जैसे शब्द ज्यादा इस्तेमाल करते हैं। प्रोग्रामिंग में इन शब्दों को रखा गया। इसी बीच एक स्टूडेंट ने पोस्ट डाला 'Ugh, I have so much home work I just wanna kill myself'. प्रोग्रामिंग की वजह से फेसबुक एआई को लगा कि अकाउंट होल्डर आत्महत्या करने जा रहा है। पूरी टीम एक्टिव हो गई। बाद में पता चला कि यह सामान्य वाक्य है, जो काम के दबाव के बीच बोलचाल में आम है।
टीम फिर एक्टिव हुई। अब बारी थी कमेंट, स्थान, समय और क्षेत्रीय हालात के डेटा विश्लेषण की। Tell me where you are, Has anyone heard from him/her, Call anytime, I'm here for you, Are you ok, Can I help you जैसे कमेंट को भी प्रोग्रामिग में रखा गया। सामान्यतौर पर अगर कोई आत्महत्या जैसा कदम उठाने की कोशिश करता है तो उसके दोस्त कमेंट में ऐसे शब्द/वाक्य डालते हैं। आत्महत्या के अधिकतर मामले रात में सामने आए हैं। इसी रिपोर्ट के आधार पर फेसबुक ने संबंधित इलाके के टाइम डेटा को भी अपनी प्रोग्रामिंग में रखा। क्षेत्रीय हालात से मतलब जैसे किसी इलाके में महामारी, तूफान या दैवीय आपदा की स्थिति में भी आत्महत्या के मामलों में बढ़ोतरी देखी गई है। इन सब डेटा की मदद से आत्महत्या रोकने के एआई टेक्नॉलजी को मजबूत किया।
| Add caption |
#दिल्ली वाले केस में भी ऐसा ही हुआ। दिल्ली के शख्स ने मुंबई में फेसबुक लाइव कर आत्महत्या की कोशिश की। इसके बाद फेसबुक को उस पोस्ट पर जो कमेंट मिले, उसे आर्टिफिशल इंटेलिजेंसी ने आत्महत्या के प्रयास की श्रेणी में डाल दिया। इसका अलर्ट फेसबुक की कर्मचारी को मिला। उसने दिल्ली पुलिस को सूचना दी और बाकी सारी बातें खबर में है। इस तरह से एआई टेक्नॉलजी ने एक जिंदगी बचा ली।
ब्लर दिखे तो यहां से पढ़ें:
https://epaper.navbharattimes.com/imageview_5502_69769_4_20_10-08-2020_3_i_1_sf.html


टिप्पणियाँ