हवा, पानी और लाइफस्टाइल बढ़ा रहा एनसीआर में कैंसर

देश की विकास दर जब 7 पर्सेंट के आसपास थी, तब दिल्ली एनसीआर 12.41 पर्सेंट की रफ्तार आगे बढ़ रहा था। लेकिन, अब एनसीआर के लिए की यह रफ्तार महंगी पड़ रही है। वजह कैंसर के बढ़ते केस हैं। रिसर्च कहती है कि यहां #कैंसर की प्रमुख वजहों में दूषित हवा, पानी और लाइफस्टाइल है।

गाजियाबाद, गौतमबुद्ध नगर, फरीदाबाद, गुड़गांव में पिछले साल अप्रेल-मई और नवंबर-दिसंबर का वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 600 पॉइंट तक पहुंचा था। मॉनसून में भी एक्यूआई औसतन 200 से ज्यादा रहा। ऐसे हालात करीब 4 साल से बने हुए हैं। अच्छी सेहत के लिए एक्यूआई 50 तक होना चाहिए। 500 पॉइंट से ऊपर यह जानलेवा है। विकसित देशों में सामान्य तौर पर 150 से ज्यादा एक्यूआई होने पर अलर्ट जारी कर दिया जाता है। सरकारें तमाम उपाय करती हैं। कृत्रिम बारिश का भी सहारा लिया जाता है। लेकिन, एनसीआर में सार्वजनिक एयर फिल्टर की भी व्यवस्था नहीं है। हालांकि दिल्ली के कुछ इलाकों में एयर फिल्टर लगाया गया, लेकिन आबादी के हिसाब से नाकाफी है। प्रदूषण फैलाने वाली इकाइयों पर जुर्माना तो लगाया जाता है, लेकिन उस जुर्माने की रकम का हालात सुधारने में इस्तेमाल की अपने यहां मजबूत व्यवस्था नहीं है। हवा में उड़ रहे लेड, मैग्निशियम, कॉपर, जिंक जैसी खतरनाक धातु फेफड़ों के कैंसर की वजह बनती है।


हिंडन नहर गाजियाबाद और गौतमबुद्ध नगर में सिंचाई का प्रमुख साधन है। आसपास के किसान सब्जियों को धोने में भी इसी नहर के पानी इस्तेमाल करते हैं। फुड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड अथॉरिटी (FSSAI)  ने पिछले साल अपनी जांच में यहां की सब्जियों में 60 पर्सेंट तक लेड, जिंक, मर्करी, कोबाल्ट और कैडियम की मात्रा अधिक पाई थी। इसकी वजह हिंडन के पानी का दूषित होना है। भूजल, नहर और नदियों का पानी दूषित करने में यहां की फैक्ट्रियों का अहम रोल है। वाटर ट्रीटमेंट सिस्टम की व्यवस्था तो कई जगह बस कागजों में है। अमेरिका, जापान, कनाडा जैसे देशों में लाइव मॉनिटरिंग की व्यवस्था 2013 से है, लेकिन अपने यहां अब भी ऐसा नहीं हो सका है। इसी का फायदा कंपनियां उठाती हैं और बगैर ट्रीट किया पानी सीधे नहर, नदी और जमीन में डाल रही हैं। 2019 एनजीटी के आदेश पर केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने गुड़गांव, फरीदाबाद, गाजियाबाद और नोएडा के 119 उद्योगों को बंद करने का निर्देश दिया था। ये भूजल दूषित कर रहे थे। पेंट, डाई, केमिकल आदि की फैक्ट्रियां थी। इनमें से 64 फैक्ट्रियां गाजियाबाद और गौतमबुद्ध नगर क्षेत्र की थीं। 2 साल बीत चुके हैं, लेकिन एनजीटी के आदेश पर पूरी तरह अमल नहीं हुआ। गाजियाबाद से ऐसी 50 फैक्ट्रियों को बागपत शिफ्ट करा दिया गया। अब वहां भी हालात यहां की तरह हो चुके हैं।

एनसीआर में कैंसर की तीसरी बड़ी वजह लाइफस्टाइल है। मीडिया रिसर्च कहती है कि यहां का हर व्यक्ति औसतन 10 मिनट भी व्यायाम के लिए नहीं निकालता है। इसकी वजह से मोटापा की दर लगातार बढ़ रही है। डब्ल्यूएचओ के लिए काम करने वाली इंटरनैशनल एजेंसी फॉर रिसर्च ऑन कैंसर (IARC)  का एक शोध पिछले साल फरवरी में सामने आया था। इसमें बताया गया कि अधिक वजन, मोटापा, शारीरिक गतिविधियों का कम होना, सुस्त जीवनशैली, स्तन और कोलोरेक्टल कैंसर की प्रमुख वजह बन रहा। मोटापे में फास्ट फूड, शराब आदि का सेवन अहम रोल अदा कर रहे। कोलोरेक्टल कैंसर को बड़ी आंत का कैंसर भी कहते हैं। दुनियाभर में तेजी से फैल रही कैंसर की यह तीसरी किस्म है।  

इलाज महंगा, फिर भी नहीं है सरकारी अस्पताल

महंगा इलाज कैंसर से उबरने में बड़ी समस्या बन रहा। सरकारी स्तर पर भी उदासीनता है। गाजियाबाद, गौतमबुद्ध नगर, गुड़गांव और फरीदाबाद के किसी भी सरकारी अस्पताल में कैंसर के इलाज की सुविधा नहीं है। निजी अस्पतालों के बाद एम्स इसके लिए आखिरी विकल्प है।  डब्ल्यूएचओ की रिपोर्ट के अनुसार, 2018 में हमारे देश में करीब 16 लाख नए कैंसर मरीज मिले। इनमें से 15 में से एक मरीज की बीमारी से मौत की बात कही गई थी। पिछले साल सरकार ने राज्यसभा में कहा था कि कैंसर समेत गैर संचारी रोगों के लिए जिला स्तर पर 616 क्लिनिक खोले जाएंगे। कम्यूनिटी हेल्थ सेंटर के स्तर पर इनकी संख्या 3827 होगी। 1200 कैंसर मरीजों पर 2018 में एक शोध हुआ था। तब पता चला था कि औसतन हर मरीज हर साल डेढ़ लाख रुपये कैंसर के इलाज पर खर्च कर रहा है। दूसरे रोगों की तुलना में यह खर्च 3 गुने से ज्यादा है।

क्या हो सकते हैं उपाय

-    वायु और भूजल प्रदूषण रोकने की व्यवस्था का डिजिटलीकरण करके लाइव करें, ऐसी हर फैक्ट्री को इस व्यवस्था से जोड़ें

-    वायु प्रदूषण फैलाने वाली फैक्ट्रियों के लिए एयर फिल्टर लगाना अनिवार्य हो

-    सरकार की तरफ से भी सार्वजनिक स्थानों पर एयर फिल्टर लगाए जाएं

-    बार, मॉडलशॉप पर सरकार की उदारीकरण की नीति खत्म हो

-    रोज कम से कम 10 मिनट व्यायाम के लिए लोगों को जागरूक करें, कॉरपोरेट सेक्टर अपने संस्थान में ही इस पर अमल कर सकते हैं

-    कैंसर के इलाज और स्वास्थ्य बीमा से टैक्स हटाकर सब्सिडी के दायरें में लाएं

-    कैंसर से बचाव, इलाज, स्वास्थ्य बीमा के लिए एनजीओ को जागरूकता शुरू करनी चाहिए

-    विकास का केंद्रीयकरण खत्म हो। एनसीआर से बाहर फैक्ट्रियां लगाने को प्रोत्साहित करें

#cancer

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