Pegasus स्पाईवेयर या मैलवेयर? किसने किया था पहला इस्तेमाल?

Netflix पर एक सीरीज है अल चैपो। मैक्सिको के कुख्यात ड्रग माफिया El Chapo गूसमैन की कहानी है। सोच रहे होंगे कि पेगासस का इस ड्रग माफिया से क्या कनेक्शन? मैक्सिको सरकार ने अल चैपो को पकड़ने के लिए पेगासस का ही इस्तेमाल किया था। सार्वजनिक तौर पर पहली बार किसी सरकार ने पेगासस के इस्तेमाल की बात स्वीकार की थी। मैक्सिको सरकार ने बताया था कि किस तरह से पेगासस से मिली सूचनाओं से ड्रग माफिया की सल्तनत को ध्वस्त करना आसान हो गया। कुछ वक्त पहले वॉट्सऐप ने भी जासूसी का सवाल उठाया था। 

पेगासस मतलब उड़ता हुआ घोड़ा। अब पहला सवाल है कि पेगासस स्पाईवेयर है या मैलवेयर? इसके लिए इनकी फैमिली हिस्ट्री समझिए। मैलवेयर के 6 प्रकार होते हैं। वायरस, वार्म्सवेयर, ट्रोजन, रैंसमवेयर, स्पाईवेयर और ऐडवेयर। बाकी सब तो आते-जाते रहते हैं, लेकिन खतरनाक केवल रैंसमवेयर और स्पाईवेयर ही हैं। 

अब ये स्पाईवेयर कैसे होते हैं और क्या करते हैं? 

स्पाईवेयर सामान्यतौर पर केवल 2 पॉइंट पर काम करते हैं। पहला कूकीज और दूसरा की-लॉगर। की-लॉगर मोबाइल या लैपटॉप पर जब कोई बटन दबाते हैं तो इसकी सूचना अपने बॉस मतलब जिसने इसे भेजा है, उस तक पहुंचाता है। लेकिन, असली आतंकी तो कूकीज टाइप वाला स्पाईवेयर होता है। सवाल आ रहा होगा कि कई वेबसाइट भी कूकीज का नोटिफिकेशन देकर अनुमति मांगती हैं। ये अनुमति इसी स्पाईवेयर को आपके सिस्टम में डालने के लिए मांगी जाती है। वेबसाइट जानना चाहती हैं कि आपकी पसंद क्या है? कूकीज उनसे आपकी यही चुगली करती है। उदाहरण के लिए अगर आपने किसी वेबसाइट पर एक शर्ट देखी तो दूसरी वेबसाइट खोलते ही आपको शर्ट के कई विज्ञापन दिखने लगेंगे। ये सूचना कूकीज ही लीक करती है। 

फिर पेगासस से इतनी चिंता क्यों?

अभी तक जो भी स्पाईवेयर सामने आए हैं, उन सब में यह सबसे खतरनाक है। इजराइल के एनएसओ ग्रुप ने इसे बनाया है। कंपनी का दावा है कि पेगासस सामान्य व्यक्ति को नहीं बेचते हैं। ये किसी भी देश के हुक्मरानों को ही अपना सॉफ्टवेयर बेचते हैं। वॉशिंगटन पोस्ट की एक रिपोर्ट के मुताबिक, पेगासस इतना खतरनाक है कि किसी भी सिस्टम में जाने के लिए इसे अनुमति की जरूरत नहीं पड़ती। वॉट्सऐप पर मिस्ड कॉल से भी ये आपके मोबाइल में जा सकता है। मोबाइल में आने के बाद मिस्ड कॉल की हिस्ट्री हटा सकता है। कैमरा, माइक, लोकेशन खुद से ऑन कर सकता है। बाकी सिस्टम में ताकझांक तो छोटी बातें हैं। 

कैसे हुई जासूसी

पेगासस से जुड़ी हुई एक केस स्टडी से मामला समझिए। एक व्यक्ति मान लो, इमरान खान के मोबाइल में यह स्पाईवेयर डाल दिया गया। इमरान को शक हुआ कि उनकी जासूसी हो रही है। उन्होंने कमर बाजवा से कहा कि मोबाइल पर बात नहीं कर सकते, मिलकर बताएंगे। जनरल बाजवा और इमरान खान के मोबाइल की लोकेशन जैसे ही करीब आई, पेगासस सतर्क हो गया। दोनों के मोबाइल का माइक ऑन करके आमने-सामने की रिकॉर्डिंग अपने आका तक भेज दी। 

तो क्या 50 हजार लोगों की जासूसी हुई 

नहीं, 50 हजार लोगों को टारगेट किया गया। मतलब अखबार ने यह दावा किया कि 50 हजार लोगों को पेगासस से टारगेट किया गया। इसका मतलब यह नहीं हुआ कि इन 50 हजार लोगों के मोबाइल, लैपटॉप, कंप्यूटर में पेगासस की एंट्री हो ही गई। कहा जा रहा है कि कुछ ऐसे भी सिस्टम थे, जहां पेगासस की एंट्री नहीं हो सकी। हालांकि एंट्री क्यों नहीं हुई, यह जानकारी बाहर नहीं आ सकी है। लोगों का सुख-चैन उड़ाने वाला आईटी का एक ऐसा ही तबगा है, जो अब उस लूपहोल का पता लगाने में जुटा है कि आखिर कुछ सिस्टम पेगासस से कैसे सुरक्षित रह गए? 

ऐसे झमेले से बचने का रास्ता

एक बात साफ है कि अगर आप इंटरनेट पर कहीं से भी किसी तरह जुड़े हैं तो निजता की चिंता मत कीजिए। सबसे बड़ी जासूसी तो आपके मोबाइल में जमे गूगल बाबा करते हैं। कहां गए, कितनी देर रुके, क्या खरीदा, क्या खाया सबकी खबर रखते हैं। वेबसाइट पर क्लिक किया तो कूकीज एक्सेप्ट किया, वहां से कई सूचनाएं आपने उस वेबसाइट के साथ शेयर कर दी। ऐसे में इंटरनेट के साथ जुड़कर इस झमेले से नहीं बच सकते। इससे बचने का एक ही उपाय है बेसिक फोन, जिसमें केवल मेसेज और कॉल करने का ऑप्शन हो। 

पेगासस के अलावा किसी और से कैसे बचें?

- किसी बढ़िया कंपनी का एंटी वायरस सिस्टम में डालें। उसे हर वक्त अपडेट रखें। 

- अनजान ई-मेल, मल्टीमीडिया मेसेज न खोलें।

- जिस वेबसाइट के एड्रेस में https के बाद एस न दिखे, उसे बिल्कुल न खोलें।

- कोई ऐप इंन्स्टॉल करें तो वह क्या-क्या एक्सेस करने वाला है, उसे जरूर देंखे।  

- पासवर्ड हमेशा कम से कम 8 अंकों का बनाएं। कैपिटल लेटर, डिजिट, स्पेशल कैरेक्टर उसमें जरूर शामिल करें। पासवर्ड महीने में एक बार जरूर बदल दें। और हां, पुराने पासवर्ड से मिलाजुला बिल्कुल न बनाएं। नाम, जन्मदिन, गाड़ी का नंबर, मोबाइल नंबर के कुछ अंक, जानू-वानू टाइप ये सब आसान पासवर्ड की श्रेणी में आते हैं।

- पायरेटेड सॉफ्टवेयर, मूवी, विडियो से बिल्कुल दूरी बनाकर रखें।  

टिप्पणियाँ