सामाजिक भाईचारे को तोड़ती नहीं, जोड़ती है हमारी हिंदी

‘दुकानें जल रही थीं। भगदड़ मची थी। पुलिस के पहुंचने से पहले कुछ युवकों का झुंड खड़ा था। वे उर्दू में बात कर रहे थे।’ शुरुआत के 3 वाक्य घटनाक्रम समझने में भले मदद करें, लेकिन आखिरी वाक्य सीधे तौर पर मुसलमान की पहचान बताने के लिए काफी है। 


हिंदी हिंदुओं की और उर्दू मुस्लिमों की भाषा है। ऐसी धारणा समाज में बैठाई गई है। हिंदीभाषी इलाकों में ही इस सोच को विकसित किया गया। बांग्ला, मराठी, तमिल, पंजाबी बोलचाल वाले इलाकों में ऐसा बिल्कुल नहीं है।


किसी खास धर्म, समुदाय का ठप्पा लगाने वालों ने इसका सबसे ज्यादा अहित किया। हमारी हिंदी जोड़ती है। समाजिक भाईचारे की अनगिनत कहानियों को इसने अपने आंचल में समेटा है। अवधी, ब्रज, मैथिली, भोजपुरी, राजस्थानी और खड़ीबोली ने इसे समृद्ध किया है। कबीर, रैदास, मलिक, मोहम्मद जायसी, सूरदास, तुलसी, रहीम, रसखान जैसे कवि इसकी आत्मा हैं।


आदमी, औरत, उम्र, कीमत, किस्मत, दुकान, किताब, अक्ल, आईना, आदत, आहट, ईमान, ऐनक, खबर, जवाहर, जुर्माना, तकरीबन, दिमाग, फसाद, बिल्कुल, मुश्किल, शुक्रिया जैसे कई अरबी शब्द हम रोज इस्तेमाल करते हैं। हमारी हिंदी ने आंचल में इन्हें ऐसे समेटा है कि कभी अहसास भी न हुआ होगा कि ये बाहरी हैं। 


जलेबी, चश्मा, चेहरा, जहर, मकान, शादी, सरकार, लेकिन, लाल, वापस, अंगूर, अंदर, अक्सर, अगर, अजीज, अमीर, असल, असली, आरजू, आराम, आलू, आवाज, आवारा, आशिक, इज्जत, इलाज, इजाजत, कद्दू, कम, कमजोर, कमीज कहने को तो फारसी शब्द हैं, लेकिन कभी हिंदी ने बताया कि ये दूसरे धर्म को मानने वालों की जुबान हैं? 


चाकू, चम्मच, बारूद, कैंची, कुर्ता, बहादुर, लाश, अमानत, अलविदा, इंतजाम, इंतकाम, कालीन, किनारा, कीमत, कुली, खजाना, जाहिर, तकरार, तबीयत, तमगा, तमंचा, दौलत, निशान, नौकर, फायदा, फुर्सत जैसे तुर्की शब्दों ने भी खुद को हिंदी में ऐसे ढाल लिया कि कोई इन्हें अलग कर ही नहीं सकता। 


हिंदी और उर्दू की समानता (similarities between hindi and urdu)

भारतीय उपमहाद्वीप में बोली जाने वाली 2 प्रमुख भाषाओं में उर्दू और हिंदी का स्थान है। सामान्य शब्दावली दोनों की बिल्कुल एक है। विशेष संदर्भों में कई बार हिंदी में संस्कृत की अधिकता हो जाती है। उर्दू में अरबी और फारसी घुल जाता है। 


भाषा के विद्वानों का मानना है कि नामभेद, लिपिभेद और शैलीभेद के अलावा दोनों भाषाएं लगभग एक हैं। खड़ी बोली हिंदी में अरबी, फारसी के मेल से जो भाषा बनी वही उर्दू है। वैसे उर्दू का अर्थ छावनी, शाही लश्कर और किले के अर्थ में होता है। 


अंग्रेजों की कूटनीति से दूर हुई हिंदी-उर्दू

अंग्रेजों ने हमारी सांस्कृतिक विरासत को भी विकृत करने का खूब प्रयास किया। हिंदी और उर्दू के बीच बनी खाई की बड़ी वजह अंग्रेजों की कूटनीति भी थी। हिंदी की संस्कृत से निष्ठता बढ़ती गई और उर्दू का फारसीपन से। लिपिभेद तो था ही। सांस्कृतिक वातावरण की दृष्टि से भी दोनों का पार्थक्य बढ़ता गया।


अंग्रेजों ने हिंदी और उर्दू के बीच दरार डालने के बाद नई भाषा को प्रचलित किया। उसे हिंदुस्तानी नाम दिया। अरबी, फारसी और संस्कृत के कठिन शब्दों को हटाकर आम लोगों की समझ वाली हिंदुस्तानी भाषा बनाई। लेकिन, यह केवल दिखावा था। राजकीय कामकाज में जो भाषा इस्तेमाल करते थे, हिंदुस्तानी उसी का स्वरूप थी। धीरे-धीरे इसमें फारसी और अरबी के कठिन शब्द फिर ठूंस दिए गए। 


2019 में दिल्ली हाई कोर्ट ने उठाए थे सवाल

अंग्रेजों ने हिंदुस्तानी भाषा को आमजन की भाषा प्रचारित किया था। यही वजह थी कि इसे कामकाज की भाषा बना दिया गया। दिल्ली हाई कोर्ट ने 2019 में कामकाज की इसी भाषा से 383 शब्दों को निकालने का आदेश दिया। रूबरू, इश्तेहार, जाहिर, राजीनामा, मुजरिम, गुफ्तगू, संगीन अपराध, तफ्तीश जैसे कुछ आसान शब्द भी इसी लिस्ट में हैं। 


2019 अगस्त में एक वकील ने इस बारे में एक याचिका दायर की थी। कोर्ट ने पुलिस कमिश्नर से पूछा था कि उर्दू और फारसी के शब्दों में केस क्यों दर्ज करते हैं, जबकि शिकायतकर्ता ऐसे शब्द समझ नहीं पाता। 


जो 383 शब्द हटाने के लिए हाई कोर्ट ने कहा था, उनमें ये थे शामिल

अरसाल – प्रस्तुत.

अफसरान बाला – उच्च अधिकारी.

इक़बाल – स्वीकार.

इस्तगासा – शिकायत, कंप्लेंट.

काबिल दस्त अंदाज़ी – संज्ञेय अपराध. ऐसा अपराध जिसमें गिरफ्तार करने के लिए पुलिस को वॉरंट की ज़रूरत नहीं होती.

ख़ाना तलाशी – यानी की सिंपली तलाशी. सर्च

तफ्तीश –  जांच, इन्वेस्टिगेशन

ज़ेर-ए-तफ्तीश – जांच जारी

सज़ायाफ्ता – सज़ा काट चुका व्यक्ति

तहरीर – लेख, आर्टिकल, एप्लीकेशन

तामील – पालन

दरयाफ्त – पूछताछ

फेहरिस्त – सूचि, लिस्ट.

मुसम्मी – नाम से पहले लगने वाला श्री, मिस्टर

मुद्दई – शिकायतकर्ता

मज़कूरा – घायल पुरुष

मज़कूरिया – घायल स्त्री

मौसूल – प्राप्त, रिसीव्ड

नकुलात – नकल प्रतियां, डुप्लीकेट कॉपीज़.

सरज़द – घटित 

बज़रिये – के माध्यम से, के द्वारा

जामा तलाशी – व्यक्तिगत तलाशी

मंज़ूरशुदा – स्वीकृत

बाहुक्म – की आज्ञा से

जिरह – बहस, तर्क

मुतल्लिक – संबंधित

मद्दे नज़र – ध्यान में रखते हुए

मशकूक – संदिग्ध

मिसल, मिस्ल – फ़ाइल, पत्रावली

मुअत्तल – निलंबित

मुआईना – निरीक्षण

समायत – सुनवाई

हलफ़न – शपथपूर्वक

दीगर – अन्य

ताज़िराते हिंद – भारतीय दंड संहिता

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