सेमीकंडक्टर को समझने के लिए एक मूवी का उदाहरण जरूरी है। साल 1993 में राजकुमार अभिनित फिल्म तिरंगा तो देखी होगी। एक सीन में मिसाइल के फ्यूज कंडक्टर निकालकर ब्रिगेडियर सूर्यदेव (राजकुमार) हमले को नाकाम करते हैं। फ्यूज कंडक्टर के बिना मिसाइल बस खिलौना बनकर रह जाती हैं। बिल्कुल वही काम आज के सेमीकंडक्टर का भी है।
यह दुकानों पर इलेक्ट्रॉनिक सामान की तरह नहीं बिकता, इसलिए हमारे लिए नया हो सकता है। लेकिन, बगैर इसके हमारी जिंदगी को आसान बनाने वाले कई सामान तिरंगा मूवी की उसी मिसाइल की तरह फुस्स हो जाएंगे।
क्या है सेमीकंडक्टर का इस्तेमाल (what are semiconductors use)
एसी में जो तापमान का सेंसर होता है, वह सेमीकंडक्टर की वजह से ही काम करता है। इसी तरह कंप्यूटर का सीपीयू, मोबाइल, स्मार्टफोन, स्मार्ट वॉच, डिजिटल कैमरा, टीवी, वॉशिंग मशीन, फ्रिज, एलईडी बल्ब, ओवन, इलेक्ट्रिक कूकर, एटीएम, अस्पताल के लाइफ सपोर्ट सिस्टम सबका दिल मान लीजिए यह सेमीकंडक्टर ही होता है। कार में लग्जरी फीचर का जो लुफ्त उठाते हैं, उसकी वजह भी यह सेमीकंडक्टर ही है।
कैसे काम करता है सेमीकंडक्टर (how to work semiconductor)
इसे समझने के लिए 10वीं में पढ़ी थोड़ी फिजिक्स याद करनी होगी। 2 तरह के पदार्थ होते हैं- बिजली के कुचालक और सुचालक। ये सेमीकंडक्टर इन दोनों का मिश्रण होता है। जो करंट आता है, उसे कंट्रोल करने का जिम्मा इसी का होता है। सिलिकॉन (Silicon) से बना सेमीकंडक्टर माइक्रो सर्किट में फिट होता है।
अभिन्न हिस्सा है सेमीकंडक्टर
सेमीकंडक्टर हाई-एंड कंप्यूटिंग (high-end computing), ऑपरेशन कंट्रोल (operation control), डेटा प्रोसेसिंग (data processing), स्टोरेज, इनपुट और आउटपुट मैनेजमेंट, सेंसिंग, वायरलेस कनेक्टिविटी और कई अन्य कामों में मदद करते हैं। ऐसे में ये चिप्स आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (artificial intelligence), क्वांटम कंप्यूटिंग, एडवांस्ड वायरलेस नेटवर्क्स, ब्लॉकचेन एप्लिकेशंस, 5G, IoT, ड्रोन (drone) , रोबोटिक्स (robotics), गेमिंग और वियरेबल्स का अभिन्न हिस्सा बन चुके हैं।
निर्माण पर बस 3 देशों का है एकाधिकार
जहां भी इलेक्ट्रॉनिक नाम आएगा, उसकी जान सेमीकंडक्टर ही है। लेकिन इसे बनाने वाली अधिकतर कंपनियां 3 देशों की हैं। अमेरिका, ताइवान और साउथ कोरिया की कंपनियों का एकाधिकार है। दुनिया के 90 पर्सेंट से ज्यादा सेमीकंडक्टर का उत्पादन इन्हीं की कंपनियों से होता है।
चीन के बाजार को हिलाने की साजिश
दुनिया में 5जी का काम इस वक्त तेजी से चल रहा है। 5जी के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर उपलब्ध कराने में चीन ने भारी निवेश किया है। चीनी कंपनी हुवावे बड़ी कंपनी के तौर पर वैश्विक पटल पर आई। सेमीकंडक्टर का पिछले साल तक बड़ा सौदागर था। अमेरिका के साथ तीखे रिश्तों ने इस कंपनी के कारोबार को काफी हद तक प्रभावित किया।
अमेरिका नहीं चाहता कि 5जी में चीन का अधिपत्य हो। अगर सेमीकंडक्टर की शॉर्टेज हो जाए तो चीन का प्लान काफी हद तक प्रभावित हो सकता है। एक्सपर्ट का अंदेशा है कि इसी वजह से अमेरिका ने अपनी हनक से ताइवान और साउथ कोरिया को साथ लेकर चिप की शॉर्टेज का ड्रामा रचा है। ताइवान और साउथ कोरिया की चीन के साथ तल्खी भी जगजाहिर है।
कोरोना (Covid-19) भी हो सकती है वजह
कोरोना ने जब दस्तक दी तो चिप बनाने वाली कंपनियों का कामकाज भी प्रभावित हुआ। लॉकडाउन की वजह से लंबे समय तक यहां प्रोडक्शन बंद था। दोबारा से काम को पटरी पर लाने में करीब 2 साल तक का वक्त लगने की बात कही जा रही है। अभी जो प्रोडक्शन हो रहा है, वह महज 30 से 50 पर्सेंट के बीच है। शॉर्टेज की एक वजह यह भी बताई जा रही है।
इतनी महत्वपूर्ण चिप के लिए कब होंगे आत्मनिर्भर
आईटी और साइबर सिक्युरिटी में हम विश्व पटल पर मजबूत दावेदारी दर्ज कराते हैं। साइबर सिक्युरिटी में तो दुनिया में टॉप 10 में आ चुके हैं। लेकिन, इतने अहम पुर्जे को लेकर अब तक आत्मनिर्भर की स्थिति नहीं बन सकी है। अगली लड़ाई व्यापार की ही है। वैश्विक स्तर पर हम बड़े बाजार के रूप में दिख रहे हैं। आगे बढ़ने के लिए जरूरी सामानों में आत्मनिर्भरता अहम होगी। वक्त आ गया है कि सरकार के साथ ही उद्योगपति भी चिप निर्माण की दिशा आगे बढ़ें।
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