जब किचन गार्डेन के कॉन्सेप्ट ने क्यूबा को खाद्य संकट से उबारा

खाने के स्टोर पर लगती थी लंबी लाइन
1990 का दौर था। सोवियत संघ और अमेरिका (America) के बीच चल रहा शीत युद्ध फैसले के मुहाने पर था। यही वक्त था जब यूएस के प्रतिबंध की वजह से क्यूबा में भयानक खाद्य संकट (Cuba food shortage) हुआ। 

सरकारी गोदाम लगभग खाली हो चुके थे। सरकारी स्तर पर बहुत थोड़ी मात्रा में भोजन बांटा जाता। उसकी गुणवत्ता भी बेहद घटिया होती। भूख से तड़पते लोग दम तोड़ने लगे। खेत बंजर पड़े थे। 

कुछ शोधकर्ता इस खाद्य संकट की एक वजह रासायनिक खाद के ज्यादा इस्तेमाल को भी मानते हैं। यह वह दौर था जब क्यूबा रासायनिक खादों का इस्तेमाल अमेरिका से ज्यादा कर रहा था। 


जानवरों की हत्या रोकने के लिए बनाना पड़ा था सख्त कानून

भूख से तड़पते लोग जानवरों को खाने लगे थे। हवाना चिड़ियाघर (Havana zoo) से भी जानवरों के चुराने की खबरें आने लगीं। बिल्लियों की आबादी कम हो गई। मवेशियों की चोरी रोकने के लिए सरकार को सख्त कानून बनाना पड़ा। 

गाय की हत्या में 10 साल तक की कैद, बगैर अनुमति के गोमांस  बिक्री पर 8 साल की जेल, अवैध बीफ खाने पर एक साल की जेल जैसे सख्त कानून लागू कर दिए गए। 


लोगों ने घर और खाली जगह उगाई सब्जियां

क्यूबा में अब आम है घर की खाली जमीन पर सब्जियां उगाना
रखरखाव के अभाव में बिल्डिंगें गिरने लगीं तो सरकार ने इन्हें तुड़वा दिया। पार्क और कई सार्वजनिक स्थल वीरान हो गए। तब लोगों ने किचन गार्डन की शुरुआत की। जहां भी खाली जगह देखते सब्जियां लगा देते। बालकनी, छत, आंगन, खाली पड़ी पार्किंग, प्लॉट, खंडहर सब जगह सब्जियां-फल बोने लगे। जमीन के हर टुकड़े का नागरिकों ने इस्तेमाल किया। 

क्यूबा सरकार को भी यह पसंद आया। सरकारी स्तर पर इसे खूब प्रमोट किया गया। ऑस्ट्रेलियाई कृषिविदों ने 1993 में पर्माकल्चर विधि का क्यूबा में कुछ लोगों को प्रशिक्षण दिया। क्यूबा सरकार ने फिर पूरे देश में प्रशिक्षण अभियान चलाने के लिए टीमें भेजीं। पार्माकल्चर की वजह से फिर रासायनिक खादों की जगह क्यूबा जैनिक खादों की तरफ शिफ्ट हुआ। किचन गार्डनिंग और जैविक खादों की वजह से पूरा देश फिर खाद्य संकट से दूर होने में कामयाब रहा।


किचन गार्डन का सेहत पर असर (Health effect of kitchen garden)

न्यूट्रिशनिस्ट ऋतुजा दिवेकर (Nutritionist Rujuta Diwekar) की किताब Eating in the age of Dieting में जिक्र है कि क्यूबा में किचन गार्डन के कॉन्सेप्ट ने केवल खाद्य संकट दूर नहीं किया, लोगों की सेहत में भी इससे सुधार हुआ। इसकी वजह थी गार्डेनिंग व साइकलिंग। लोगों का वजन कम हुआ। दिल की बीमारियां, मधुमेह के रोगी घटे। जॉन्स हॉपकिन्स के एक शोधकर्ता की रिपोर्ट में सामने आया कि 4 वर्ष के बीच शिशु मृत्युदर में भी इस दौरान भारी गिरावट आई। शोधकर्ता ने इसकी वजह बढ़ी हुई शारीरिक गतिविधि, कम कैलोरी के सेवन को बताया। 

अमेरिकन जर्नल ऑफ एपिडेमियोलॉजी का एक पेपर प्रकाशित हुआ। उसमें भी क्यूबा के उस दौर का जिक्र था। मधुमेह (51%), कोरोनरी हृदय रोग (35%), स्ट्रोक (20%) और दूसरे सभी कारणों से (18%) कम मौत हुई। इसमें बताया गया कि लोगों ने भोजन मे पोषण मूल्यों को बचाते हुए ऊर्जा भंडार को बरकरार रखा। हालांकि कैनेडियन मेडिकल एसोसिएशन जर्नल (सीएमएजे) ने इसका खंडन किया था। उन्होंने इसे भयानक त्रासदी बताते हुए 30 हजार से ज्यादा क्यूबाई को देश छोड़ने या मौत होने की बात कही थी।


किचन गार्डन के फायदे (what is the importance of kitchen garden)

किचन गार्डन के 3 मुख्य फायदे हैं। पहला तो बगैर किसी रासायनिक खाद के सब्जियां तैयार होती हैं। जैविक खादों और किचन से निकले वेस्ट से ही इन्हें भरपूर पोषण मिल जाता है। 

दूसरा फायदा थोड़ा और भी वैज्ञानिक है। दरअसल किचन गार्डन में ज्यादा वैज्ञानिक तरीके से कुछ उगाना मुश्किल होता है। ऐसे में हम उन्हीं सब्जियों को उगाते हैं जो स्थानीय वातावरण के अनुकूल होती हैं। हमारा शरीर स्थानीय वातावरण के अनुकूल उगने वाले खाद्य पदार्थों के लिए बना होता है। ऐसे में इन्हें हमारा शरीर आसानी से एक्सेप्ट कर लेता है। 

तीसरा लाभ से पौष्टिकता से जुड़ा है। किसान के खेत से बाजार तक सब्जियों को पहुंचने में सामान्यतौर पर 7-8 घंटे का वक्त बीत जाता है। हमारे किचन तक आने में एक-2 घंटे और लग जाते हैं। न्यूट्रिशनल साइंस कहता है कि सब्जियां और फल 5 घंटे के बाद अपनी पोषणता खत्म करने लगते हैं। अब किचन गार्डन के साथ ऐसा नहीं होता है। हम उन्हें तोड़ते ही सीधे अपने इस्तेमाल में लेते हैं। यही वजह है कि उनमें भरपूण पोषण मिलता है।


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