कहानी ISIS से आंख मिलाने वाली एक बहादुर लड़की की... जिसकी मां और 6 भाइयों की आतंकियों ने की थी हत्या, बिखर गया पूरा परिवार, बना दिया था सेक्स स्लेव
इराक़ में आईएसआईएस से लड़ाई चल रही थी। गांव की सुरक्षा के लिए इराकी फौज आई। ग्रामीणों को सुरक्षा का यकीन दिलाया। गांववाले फौजियों की खूब सेवा करते। बारी-बारी से अपनी भेड़ भी परोसते।
आईएसआईएस ने हमला किया तो फौज ग्रामीणों को सतर्क किए बगैर चुपके से भाग गई। आईएसआईएस के लड़ाके यज़ीदियों के गांव पर टूट पड़े। यजीदी उनकी नज़र में काफिर थे।
कुछ गांववाले तो बचकर भाग गए। बाकी सभी पुरुषों, महिलाओं, बच्चों को गांव के स्कूल में ले जाया गया। लड़कियों को अलग करके एक बस से ISIS के कब्जे वाले दूसरे शहर भेज दिया गया। स्कूल में बचे पुरुषों और उम्रदराज महिलाओं की आतंकियों ने हत्या कर दी। Nadia की मां और कुछ भाई भी मारे गए।
युद्ध में पकड़ी गईं लड़कियों को ISIS Sex Slaves बना देते। उन्हें सबाया बोलते। 5000 डॉलर तक में बेचते या बहुत अच्छा काम करने वाले को इनाम में देते।
Nadia की उम्र तब करीब 16 साल थी। उन्हें बेचने के लिए मोसुल ले जाया जा रहा था। बस में भीषण गर्मी थी। Nadia जैसी कई लड़कियां बस में थीं। नहाए हुए कई दिन बीत चुके थे। पूरी बस में दुर्गंध से सांस लेना मुश्किल था।
गर्मी, डिहाइड्रेशन और दुर्गंध की वजह से कुछ लड़कियों ने बस में उल्टी कर दी। तब हालात और बिगड़ गए। बस में चल रहा आतंकी Nadia और दूसरी लड़कियों को परेशान कर रहा था। कुछ लड़कियों ने उसकी छुअन से बचने के लिए जबरन खुद पर उल्टी की, जिससे वह दूर रहे।
Nadia को ISIS के एक अफसर को बेचा गया। उसने धर्म परिवर्तन कराने के बाद अपनी सबाया बनाया। तमाम तरह के शोषण को झेल रही वह लड़की भागने के प्रयास में पकड़ी गई।
अफसर ने चाबुक से निवस्त्र करके पीटा। फिर सज़ा के तौर पर उस अफसर के सुरक्षाकर्मी और घर में काम करने वाले हर शख्स ने दुष्कर्म किया। इसके बाद Nadia को दूसरे को बेच दिया गया।
उनकी बहन, भतीजी, होने वाली भाभी, सहेलियों के साथ भी यही हुआ। कुछ जगह जब उनसे Nadia मिलीं तो एक दूसरे से लिपट कर सिर्फ रोती रहीं। दुष्कर्म से बचने के लिए लड़कियां खुद पर उल्टी करतीं, इतनी गंदगी में रहती कि कोई छुए न।
बेचने के क्रम में एक दिन Nadia आतंकी के चंगुल से भाग निकलीं। बचते-बचाते मोसुल के ही एक सुन्नी मुसलमान के घर में पहुंचीं। उस परिवार ने शरण दी। यह जानते हुए कि आतंकियों को पता चला तो सबको खत्म कर देंगे।
घर के मुखिया ने नकली पहचान पत्र बनवाया और अपने बेटे के साथ Nadia को उसके एक भाई तक छोड़ने की व्यवस्था की। चेकपोस्ट पर Nadia की तस्वीर लगी थी। भागी हुई सबाया को ISIS के लड़ाके ढूढ़ रहे थे।
तमाम बाधाओं को पार करती हुई बहादुर लड़की इराक के कब्जे वाले क्षेत्र में पहुंची। इराक़ में गृह युद्ध की वजह से सुरक्षाकर्मी 2 गुटों में बंटे थे। कुर्द में जो भाग गए थे, उनके विरोधी खेमे तक Nadia और उनके मददगार पहुंचे थे।
उन सुरक्षा अधिकारियों ने Nadia की कहानी को भुनाने के लिए आपबीती को रिकॉर्ड किया। मददगार का चेहरा छिपाकर चंद अफसरों को वीडियो दिखाने का वादा किया। लेकिन, सबकुछ राष्ट्रीय चैनल पर दिखा दिया। जो मददगार था, उसे ISIS ने फिर परेशान किया।
Nadia और उसका भाई भी डर गया। यजीदी धर्म में धर्मपरिवर्तन और शादी से पहले सेक्स की मनाही है। परिवार और समाज ऐसी लड़की को नहीं अपनाता। कई बार हत्या भी कर देते हैं। Nadia को इसी का डर था।
शरणार्थी शिविर में Nadia जैसी कई यजीदी लड़कियां और परिवार थे। वहां आने वाले डॉक्टर से कुछ लड़कियों ने डर से अपने कौमार्य की सर्जरी भी कराई, लेकिन Nadia ने मना कर दिया।
यजीदी धर्मगुरुओं ने भी मिसाल पेश की। बोले, धर्म कहता है कि धर्मपरिवर्तन और सेक्स करने वालों का बहिष्कार हो। लेकिन, इन लड़कियों ने इच्छा से ऐसा नहीं किया है। ऐसे में इन्हें धर्म से अलग नहीं किया जा सकता।
फिर Nadia जर्मनी चली गईं। संयुक्त राष्ट्र समेत कई बड़े मंच से अपनी आपबीती साझा की। ISIS से लड़ाई उनकी जारी है। कई बार धमकियों से भी उनके कदम नहीं रुके हैं। अपने भाषण में Nadia ने हर बार कहा कि ऐसी कहानी सुनाने वाली वे अंतिम लड़की होना चाहती हैं।
किताब The Last Girl: My Story of Captivity and My Fight Against the Islamic State से साभार।
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