ऐसी ही दिक्कतों से निपटने के लिए स्थानीय और मौसमी खाद्य पदार्थों की बहस चल रही है। यह मौसम टमाटर का नहीं होता। दिल्ली, हरियाणा, पंजाब, यूपी, एमपी, बिहार में तो सितंबर के बाद ही टमाटर की फसल तैयार होती है। लेकिन, कुछ जगह से जुलाई के बाद टमाटर मार्केट में पहुंचने लगता है। जून तक का मौसम कच्चे आम का होता है। दही का होता है। हमारी थाली में कुछ दशक पहले तक टमाटर की जगह तब यही होते थे।
गर्मी में टमाटर के नुकसान (Disadvantages of Tomatoes)
फूड साइंस कहता है कि 40-42 डिग्री तापमान वाली गर्मी में टमाटर को थाली से दूर करना ही सही फैसला है। टमाटर एसिडिक होते हैं। गर्मी में पाचन तंत्र कमजोर हो जाता है। इस बीच टमाटर पाचन तंत्र को और खराब कर सकता है। पित्त और वात की समस्या भी बढ़ सकती है। ज्यादा खाने पर स्ट्रेस और एंग्जाइटी भी हो सकती है। ऐसे मौसम में अगर जोड़ों में सूजन और दर्द है तो इसकी वजह टमाटर में मिलने वाला सोलानिन अल्कालॉइड हो सकता है। यह शरीर के टिश्यू में कैल्शियम की मात्रा बढ़ा देता है, जिससे जोड़ों में दर्द की समस्या हो जाती है।
टमाटर नहीं तो फिर क्या... सब्जियों के लिए इसका विकल्प दही है। मशहूर न्यूट्रिशनिस्ट ऋजुता दिवाकर (Rujuta Diwekar) की एक किताब है इंडियन सुपरफूड्स (Indian Superfoods)। दही को इसमें सुपरफूड के तौर पर रखा गया है। दही के उन्होंने कई फायदे बताए हैं। गर्मी के इस मौसम में तो इससे बेहतर कुछ और हो ही नहीं सकता। कैल्शियम, विटामिन बी-2, बी-12, पोटैशियम, मैग्नीशियम जैसे पोषण से भरपूर होता है।
गर्मी से राहत देने वाला सुपर फूड (Summer Super Food)
थका देने वाली गर्मी से जब एनर्जी डाउन लगे तो रिफ्रेश करने के लिए यह सुपर फूड है। गर्मी में इम्यूनिटी बहुत कमजोर हो जाती है। इम्यूनिटी मजबूत करने में भी दही जैसा कुछ नहीं। उल्टी, दस्त और लू की समस्या तो इस मौसम में आम हो जाती है, ऐसे में एक कप दही रामबाण हो सकता है।टमाटर की बात चली और दही के फायदों पर टिक गए। सवाल उठ रहा होगा कि सब्जियों में टमाटर का विकल्प क्या हो? सब्जियों में टमाटर और इसकी प्यूरी की जगह उससे कम मात्रा में दही पूरी कर सकता सब्जी में दही डालने पर खटास और स्वाद तो टमाटर जैसा ही मिलता है, लेकिन टेस्ट में क्रीमीनेस का तड़का लग जाता है। हल्दी के साथ मिलने से रंगत भी उभरकर आती है। टमाटर की तुलना में दही का खर्च कम पड़ेगा। इस मौसम में टमाटर से ज्यादा सेहतमंद विकल्प भी होगा।
सब्जियों में तो दही चल जाएगी, लेकिन दाल तड़का के शौकीनों का क्या होगा? इसके लिए करीब 10-15 साल पीछे चलना होगा। गर्मियों में दाल की रेसीपी थोड़ी बदल जाती थी। दाल उबालते समय कच्चा आम डाल देते थे। फिर उसमें जीरा, हींग और मिर्च का तड़का लगता। जून के अंत तक यही दाल चलती थी। जुलाई आने तक टमाटर की नई फसल मार्केट में पहुंचती। फिर हमारी दाल से आम गायब हो जाता था। सब्जियों से दही भी दूर हो जाती। आयुर्वेद कहता है कि बरसात में दही का सेवन ठीक नहीं होता।
स्किन के लिए भी दही ही आएगा काम
सलाद के शौकीन ग्लोइंग स्किन की रट लगाते हैं। लेकिन, इसका विकल्प भी दही है। मिट्टी और पसीने से स्किन बहुत गंदी हो जाए तो ग्लोइंग और स्मूद बनाने में दही ही काम आता है। विटामिन ई, जिंक से भरपूर दही स्किन की हर जरूरत को पूरा कर चमकदार बना देते हैं। एक बात और, तेज धूप से अगर झुलस गए हैं तो भी दही ही स्किन रिपेयर का काम करेगी।
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