IAF अफसर को 28 गोलियां मारकर नाचने वाले यासीन मलिक को कांग्रेस ने बनाया था ब्रैंड एंबेसडर

घाटी में 25 जनवरी 1990 की सुबह थी। भारतीय वायुसेना (IAF) के स्क्वॉड्रन लीडर रवि खन्ना (Ravi Khanna) ड्यूटी के लिए घर से निकले थे। तभी यासीन मलिक (Yasin Malik) ने पता पूछने के बहाने रोक लिया। 


जांबाज अफसर रवि कुछ समझते उससे पहले उसने गोलियों की बौछार कर दी। पेट में सटाकर गोली मारी। वे वहीं ढेर हो गए। ठंडे पड़ चुके शरीर पर भी आतंकी यासीन गोलियां बरसाता रहा।


शहीद के शरीर पर गोलियों के 28 निशान थे। स्क्वॉड्रन लीडर रवि की तरह 3 और निहत्थे जवान शहीद हुए थे। स्क्वॉड्रन लीडर की पत्नी निर्मल खन्ना (Nirmal Khanna)  आज भी उस मंजर को नहीं भूल सकी हैं। बताती हैं कि यासीन अपने आतंकी साथियों के साथ अफसर के शव के पास नाच रहा था। 


पूर्व केंद्रीय गृहमंत्री मुफ्ती मोहम्मद सईद की बेटी रुबिया सईद को अगवा कर 5 खुंखार आतंकियों को जेल से रिहा कराने में भी यही यासीन मलिक शामिल था। 80 का दशक था, जब पूरी घाटी इसके आतंक से कांप रही थी। यासीन का नाम हर तरफ आतंक का पर्याय बन चुका था। 


वक्त बदला, सरकारें बदलीं। फिर यासीन की तकदीर ने भी करवट ली। जिस राक्षस को जेल में होना चाहिए था, वह हमारी सरकार का ब्रैंड एंबेसडर बन गया। पीएम आवास तक उसकी पहुंच हो गई। जेल की कालकोठरी में होने की जगह राजनीतिक गलियारों में घूमने लगा।


2006 का दौर था। यूपीए सरकार में मनमोहन सिंह प्रधानमंत्री थे। तब इस आतंकी को सरकारी मेहमान बनाकर प्रधानमंत्री आवास में बुलाया गया। मनमोहन सिंह ने पाकिस्तान स्टैंड पर उसके साथ चर्चा की। फिर पाकिस्तान से बातचीत के लिए ब्रैंड एंबेसडर बना दिया। 


अफजल (Afzal Guru) की फांसी पर पाकिस्तान (Pakistan) में की थी भूख हड़ताल

2001 में सांसद पर हमले के दोषी अफजल गुरु को फांसी हुई तो पाकिस्तान में भी हंगामा मचा था। लश्कर-ए-तैयबा (Lashkar-e-Taiba) चीफ हाफिज सईद (Hafiz Saeed) ने पाकिस्तान में भूख हड़ताल शुरू कर दी। उस वक्त यासीन मलिक भी हाफिज सईद के साथ भूख हड़ताल पर बैठा था। 

तस्वीरें सामने आईं तो अपने देश में भी हंगामा मचा। फिर इसने पाकिस्तान दौरे को निजी बताया। दलील दी कि इस्लामाबाद प्रेस क्लब में 24 घंटे की भूख हड़ताल की थी, लेकिन किसी को बुलाया नहीं था।


क्यों नहीं चुभते निर्मल खन्ना के सवाल

शहीद स्क्वॉड्रन लीडर की पत्नी निर्मल खन्ना के सवाल नेताओं को चुभेंगे जरूर। कहती हैं कि मेरे हसबैंड और 3 जवान शहीद हुए थे। हुकूमतों ने 32 साल और 4 महीने लगा दिए। अभी भी इंसाफ अधूरा है। दिक्कत सिर्फ इससे है कि अभी तक वो जिंदा कैसे है? खून का बदला खून से मिलना चाहिए।


अब तक नहीं मिला है रवि खन्ना को इंसाफ

स्क्वॉड्रन लीडर रवि खन्ना और 3 सैन्यकर्मियों की हत्या का केस अब भी टाडा कोर्ट में है। गवाही की प्रक्रिया में ही यह केस अभी तक फंसा है। रुबिया अपहरण का केस भी टाडा कोर्ट में है। उस मामले में यासीन समेत 9 लोगों पर आरोप तय हो चुके हैं, लेकिन सजा का ऐलान नहीं हुआ है। 


घाटी का शहीद कहलाने की चाल

कानून के जानकार मानते हैं कि दोनों मामलों में यासीन को फांसी की सजा तय है। मौत को अब वह भुनाना चाहता है। आतंकी मकबूल भट्ट और अफजल गुरु की तरह खुद भी घाटी का शहीद बनना चाहता है। 


टेरर फंडिंग (Terror Funding) में 2017 से जेल में है यासीन मलिक

पीएम नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) की सरकार ने 2017 में यासीन मलिक को टेरर फंडिंग के केस में जेल में डाला। यासीन मलिक के खिलाफ विभिन्न पुलिस थानों में अभी भी 60 से अधिक केस दर्ज हैं। कश्मीरी पंडितों की हत्या सहित कई मामलों की जांच तो अभी पूरी भी नहीं हुई है।

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