चीन भी कुछ ऐसी ही स्थितियों से जूझ रहा है। प्रमुख शहर शंघाई और बीजिंग लॉकडाउन की वजह से लगभग टूट चुके हैं। यूक्रेन युद्ध ने रूस का भी हाल बेहाल किया है। तेल और गैस की कीमतें अब तक के शिखर पर हैं।
पाकिस्तान (Pakistan Economic Crisis) के हालात तो और बुरे हैं। रात 9 बजे के बाद स्ट्रीट लाइट बंद करने तक के हालात हो गए हैं। फ्यूल और दूसरे खर्च बचाने के लिए कार्यदिवस एक दिन कम कर दिया गया है। वर्क फ्रॉम होम की अपील की जा रही।
अमेरिकी शेयर मार्केट (American stock markets) अपने ऑल टाइम हाई से करीब 25 पर्सेंट तक टूट चुका है। इसका असर अपने यहां की भी मार्केट पर पड़ा। पिछले साल अक्टूबर में सेंसेक्स ऑल टाइम हाई करीब 62,245 पर था। अब यह अपने 52 सप्ताह के न्यूनतम स्तर के करीब 52,727 पर पहुंच चुका है।
मंदी की आंच से बचाएंगी ये 7 आदतें
1. इमरजेंसी फंड
वैसे तो बड़ी कंपनियों में ऐसे फंड की व्यवस्था होती है। लेकिन, हम खुद पर भी इसे लागू कर सकते हैं। इसकी गणना करने के लिए खुद से पूछिए कि न्यूनतम कितने रुपये में पूरा महीना निकाल सकते हैं। अब उतने रुपये का कम से कम 6 महीने तक का फंड इमरजेंसी के लिए रख सकते हैं।
2. उधार पर खरीदारी को कहें न
क्रेडिट कार्ड से बेतहासा खरीदारी पर लगाम लगाएं। बाइ नाउ एंड पे लेटर (BNPL) के झांसे में न आएं। कर्ज लेकर कुछ भी खरीदने की तैयारी कर रहे हैं तो थोड़े दिनों के लिए टाल दें।
3. खर्च पर लगाम
खर्च की आदत पर तुरंत लगाम लगाने की जरूरत है। एक डायरी बनाइए। सारे खर्च उसमें लिखिए। महीने के अंत में देखिए कि कहां खर्च न करते तो काम चल सकता था। आगे उस तरह के खर्च में कटौती कीजिए।
4. बीमा
परिवार का हेल्थ इंश्योरेंस जरूर कराएं। घर में अकेले कमाने वाले हैं और आपके बाद जो हैं, उनके पास अर्निंग का अगले एक साल के अंदर में कोई खास उपाय नहीं दिखता तो टर्म इंश्योरेंस जरूर लें।
5. घर-दुकान खरीदने में जल्दबाजी नहीं
एक्सपर्ट मानते हैं कि ऐसा वक्त रियल एस्टेट में निवेश के लिए सही नहीं होता है। ऐसे में अगर घर-दुकान खरीदने की तैयारी कर रहे हैं तो जल्दबाजी न करें। हालात बुरे होने पर सौदा और सस्ता हो सकता है। जो पैसे निवेश करने की सोच रहे हैं, उसकी ज्यादा जरूरत कहीं और पड़ सकती है।
6. मार्केट में निवेश न करें
मंदी का वक्त शेयर मार्केट से दूर रहने का होता है। शेयर मार्केट और क्रिप्टो जैसे वेलेटाइल संसाधनों में निवेश बिल्कुल न करें। अगर शेयर खरीदें भी तो सिस्टमेटिक इंवेस्टमेंट प्लान (SIP) बेहतर उपाय हो सकता है। अधिकतम जोखिम को 20 पर्सेंट तक सीमित करें। इसके लिए स्टॉप लॉस लगाकर रखें।
7. सोना है खरा सौदा
मंदी के दौर में सोने में निवेश को हर लिहाज से सही बताया गया है। गोल्ड बॉन्ड या खरे सोने में निवेश सही फैसला हो सकता है। हां, जूलरी खरीदना घाटे का सौदा हो सकता है। उसमें मेकिंग चार्ज भी जुड़ा होता है और दोबारा बेचने पर बट्टा भी कट जाता है।
मंदी की ये हैं 4 वजह
1. कोविड
दुनिया की फैक्ट्री कहे जाने वाले चीन में शटर डाउन है। जीरो कोविड पॉलिसी की तहत बीजिंग और शंघाई जैसे शहरों में भी कड़ा लॉकडाउन है।
2. सप्लाई चेन
रूस यूक्रेन युद्ध की वजह से ग्लोबल सप्लाई चेन बुरी तरह प्रभावित हुआ है। युद्ध की वजह से गेहूं, निकेल, एल्युमीनियम, कोयला और दूसरे सामानों का इंपोर्ट-एक्सपोर्ट प्रभावित हुआ है।
3. तेल
यूक्रेन और रूस के युद्ध की वजह से तेल अब तक के उच्चतम शिखर पर पहुंच गया है। कई देशों में डीजल और पेट्रोल की कमी की बातें सामने आ रही हैं। महंगे तेल से ढुलाई लागत बढ़ी, जिसका असर सीधे तौर पर महंगाई पर पड़ा।
4. निवेशकों का भरोसा टूटा
विकास दर में लगातार गिरावट, मुद्रास्फिति की कमजोर हालत, अमेरिकी बाजार की चाल ने निवेशकों का हौसला तोड़ दिया है। बाजार से तेजी से रकम निकाली जा रही है। विदेशी संस्थागत निवेशकों (FPI) ने 6 महीने में करीब 1.81 लाख करोड़ रुपये निकाल लिए। यही वजह है कि निफ्टी करीब 16 पर्सेंट तक टूट चुका है।
मंदी आई तो क्या होगा
देश के सकल घरेलू उत्पाद (GDP) में लगातार 6 महीने तक गिरावट आने को ही मंदी कहा जाता है। मंदी का सबसे ज्यादा असर आईटी, ऑटोमोबाइल, टूरिजम सेक्टर पर पड़ना तय माना जा रहा है। बड़ी संख्या में नौकरियां जा सकती हैं। छोटी कंपनियों का सर्वाइव करना मुश्किल हो सकता है। बेरोजगारी बढ़ सकती है।

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